।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। सादर जय जिनेन्द्र! 'आई सपोर्ट जैनिज़्म' पर समस्त सामग्री विशुद्ध जिनधर्म प्रभावना के उद्देश्य से समर्पित है। जिनवाणी का सम्मान सर्वोपरि है; कृपया इसे पूर्ण विनय एवं सात्विक भाव से अवलोकन करें।
।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं बड़े बाबा अर्हं नमः ।।

श्री आदिनाथ जी आरती

जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की |
प्रथम देव अवतारी प्यारे, तीर्थंकर गुणवान की | जगमग.
अवधपुरी में जन्मे स्वामी, राजकुंवर वो प्यारे थे,
मरु माता बलिहार हुई, जगती के तुम उजियारे थे,
द्वार द्वार बजी बधाई, जय हो दयानिधान की ||  जगमग.
बड़े हुए तुम राजा बन गये, अवधपुरी हरषाई थी, 2
भरत-बाहुबली सुत मतवारे मंगल बेला आई थी, 2
करें सभी मिल जय जयकारे, भारत पूत महान की | जगमग.
नश्वरता को देख प्रभुजी, तुमने दीक्षा धारी थी, 2
देख तपस्या नाथ तुम्हारी, यह धरती बलिहारी थी |
प्रथम देव तीर्थंकर की जय, महाबली बलवान की || जगमग.
बारापाटी में तुम प्रकटे, चादंखेड़ी मन भाई है,
जगह-जगह के आवे यात्री, चरणन शीश झुकाई है |
फैल रही जगती में "नमजी" महिमा उसके ध्यान की || जगमग.