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दान अमीरों का लक्षण है- मुनि सुधासागर जी

किशनगढ़। 31 जुलाई, 2017 सोमवार, दिगम्‍बर जैनाचार्य 108 श्री विद्यासागर महाराज के सुयोग्‍य शिष्‍य मुनि सुधासागर महाराज ने किशनगढ़-मदनगंज में चल रहे चातुर्मास के दौरान आज धर्मोपदेश देते हुए कहा कि सभी पापों का विनाश धर्म से होता है। पाप में सफल होने के लिए देव, शास्त्र, गुरू व माता-पिता का सहारा नहीं लेना चाहिए। गुरू व बड़े परिजनों की पहचान व अंहकार का उपयोग जीवन में करने पर विनाश निश्चित होगा। भगवान गलत कार्य की सफलता के लिए नहीं, सही कार्य की सफलता के लिए है। भगवान की भक्ति, शक्ति का उपयोग घर बनाने के लिए नहीं, मंदिर बनाने के लिए करना चाहिए। धर्म व सही कार्य के लिए देव, शास्त्र गुरू की सहायता लेनी चाहिए। मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि माचिस दीप जलाने के लिए बनी परन्तु उसका उपयोग घर जलाने के काम में लिया जा रहा है जो पतन की ओर इशारा कर रहा है। सम्यक दृष्टि व ज्ञानी मंदिर में धर्म की सफलता के लिए जाता है। असमर्थ व्यक्ति दूसरों की सहायता लेता है। मुनि श्री ने उदाहरण देेते हुए कहा कि व्यक्ति कभी अकेला भोजन नहीं करता है यह भारतीय संस्कृति के साथ हमारा धर्म भी है। दान अमीरों का लक्षण है। मुनिश्री ने कहा कि कथा सुनाना लक्ष्य नहीं है, तुम्हें सुधारना मेरा लक्ष्य है। मंदिर निर्माण में दान चलकर आए वह मंदिर अतिशयकारी होता है।_

ये रहे श्रावक श्रेष्ठी
श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पंचायत के प्रचार-प्रसार मंत्री विकास छाबड़ा व धर्म प्रभावना समिति के प्रचार मंत्री संजय जैन के अनुसार प्रात: श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा, पूजन, धर्मसभा में चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट, मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्रवीण कुमार, नवीन, मनीष, अरूण, निशांत, बीना, पलक, जानवी जैन सूरत के साथ शैलेन्द्र कुमार, विजयकुमार व नानूलाल, श्रीपाल, दीपक जैन उदयपुर को मिला।

प्रस्तावित मंदिर के चित्र का अनावरण
मुनिश्री ने सिटी रोड स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के निर्माण कार्य योजना की घोषण करते हुए कहा कि मंदिर में पांच वेदियों का निर्माण किया जाएगा। मंदिर का निर्माण पाषाण से होगा। कार्यक्रम में प्रस्तावित मंदिर के चित्र का अनावरण दिनेश गंगवाल व प्रवीण जैन द्वारा किया गया। मंदिर निर्माण हेतु मूलचंद, अशोककुमार, अनिलकुमार, अतुलकुमार लुहाडिया परिवार, ताराचंद, प्रकाशचंद, प्रवीण, मुकेश, संजय, राजीव, राकेश गंगवाल परिवार, निहालचंद, राकेशमोहन, चन्द्रमोहन, गणेशचंद, लीलाकांत, प्रशांत, मंयक पहाडि़या परिवार, दिलीपकुमार, प्रेमकुमार, निरजंन बैद परिवार ने सहयोग देने की घोषणा की।

साभार:  मोनू जैन कोटा

मंदिर तो बहुत बन रहे हैं : आचार्य श्री

मंदिर तो बहुत बन रहे हैं, और बनते रहेंगे, लेकिन हम अव सरस्वती मंदिर की ओर आगे बढ़ रहे है ! आचार्यश्री ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर प्रहार करते हुये कहा कि आजकल जो शिक्षण दिया जा रहा हैं, वह किसी काम का नहीं हैं , पढ़े लिखे होने के उपरांत भी वह अपने जीवन को उन्नत नहीं बना पाते! उपरोक्त उद्गार संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने रामटेक महाराष्ट्र में चातुर्मास कलश स्थापना के दौरान अपने आशीष वचन में कहे उन्होंने कहा कि वर्तमान में पढ़े-लिखे होकर के भी लाखों की संख्या में बेरोजगारी की ओर नौजवान बढ़ रहे हैं ! पढ़ लिखने के पश्चात भी प्रबंधन सही नहीं होने से श्रम का सही उपयोग नहीं कर पा रहे है! "पहले के लोग अपने बच्चों को दायित्व सिखाते थे, लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में दायित्व का अभाव हैं," आचार्य श्री ने कहा कि अच्छे संस्कारों के लिये अपने धन का सदुपयोग करना आपका कर्तव्य हैं, यदि व्यवस्थित कार्य करोगे तो आपके यहाँ दान दातारों की कमी नहीं है,जब तक कार्य पूरा नहीं होता तब तक भरोसा नहीं होता इसलिये जिन लोगों ने आज बोलियाँ ली हैं वह ११ माह में इस ओर ध्यान दें,उन्होंने कहा कि जीवित धन और जीवित चेतना की ओर हमारी दृष्टि हैं !  जबलपुर हो या रामटेक या चंद्रगिरी। प्रतिभा स्थली तो  हमारी सभी एक ही हैं, बच्चे संस्कारित हों यही आशीर्वाद हमारा प्रतिभा स्थली की ओर हैं।  यहाँ पर ऐसी नींव और परंपरा शुरु हो रही हैं, जो  वर्षों-बरस तक चलती रहे!उन्होंने कहा कि चाहे चंद्रगिरी हो या जबलपुर या रामटेक  प्रतिभा मंडल तो एक ही होता हैं, इसमें हजारों बहनें प्रवेश  पा जाएंगी! उन्होंने कहा विशेष दक्षता प्राप्त आदर्शमति माताजी और बहनों सहित जैन कालोंनी , #इंदौर के लोग प्रबंध कर रहे है! इसमें मेरा कुछ भी नहीं है,गुरू महाराज जी का कहना था कि संघ को गुरूकुल बना देना, सो हम तो उनके उन आदेशों का  ही पालन कर रहे है।गुरुकुल की उस परंपरा की ओर हम जा रहे है आचार्य श्री ने वर्तमान में सरकार द्वारा लागू G S T के बारे में बताते हुये कहा कि यहाँ पर जी एस टी से घबराने की जरूरत नहीं है, हमारे यहाँ की जी एस टी अलग हैं, G मतलब गोमटसार S मतलव समयसार एवं T मतलव तत्वार्थसूत्र। इन तीनों को जो अपने ज्ञान में उतार लेगा उसका संपूर्ण कल्याण हो जाऐगा!उपरोक्त जानकारी अविनाश जैन विदिशा ने जिनवाणी चैनल के माध्यम से देते हुए बताया कि रामटेक में चातुर्मास कलश स्थापना का शानदार एवं जानदार कार्यक्रम संपन्न हुआ। भारतीय विद्यावाणी परिवार की ओर से भारत वर्ष के सभी भामाशाह एवं श्रेष्ठी वर्ग श्री अशोक जी पाटनी, श्री तरूण जी काला, श्री संतोष जी नागपुर, एवं सभी श्रेष्ठी वर्ग को बहुत बहुत बधाई एवं अनुमोदना। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री अमित जी पड़रिया जबलपुर ने किया इस अवसर पर लाखों की संख्या में विभिन्न नगरों से आए भक्त जन उपस्थित थे वंही जिनवाणी चैनल के माध्यम से लाखों भक्तों ने इसे लाईव देखा!

श्री विशुद्ध वचन आत्म बोध से

आषाढ़ शुक्ल । 02.07.2017 रविवार आज नवमी है। 03.07.2017 सोमवार कल दसमी है। अष्टाह्निका पर्व 01से 09 जुलाई तक हे विशुद्वात्मन ! वर्द्वमान स्वामी के शासनकाल में हम सभी विराजते है। तीर्थंकर जिनेन्द्र की पीयूष देशना जिनेन्द्रवाणी जगतकल्याणी है। नमोस्तु शासन जयवंत हो। जयवंत हो वीतराग श्रमणसंस्कृति !
निमित्त बनों पर.....ये जीव अकेला ही कर्म करता है, अकेला ही कर्म फल भोगता है।क्या तू नहीँ जानता है ? सब कुछ जानकारी भी क्यों अज्ञानी बना है ? तू किसका सुधार कर सकता है ? क्या आदिनाथ भगवान मारीच के जीव को परिवर्तित कर सके ? ओह ! उपादान की योग्यता कितनी प्रबल होती है। यदि उपादान योग्य नहीँ है तो निमित्त बिचारा कुछ नहीँ कर पाता । लेकिन बिना निमित्त के कोरा उपादान भी कुछ नहीँ करता है। जब व्यक्ति को समझाया जाए फिर भी नहीँ स्वीकार करता है अपनी गलती को और सुधार नहीँ कर पा रहा है। तो हे आत्मन् ! इसमें आप उसके उपा-दान की ही हीनता समझ,व्यर्थ के तनाव में मत बैठ। अथवा यह सोच कि मेरे अशुभ कर्म का उदय है जो कि मेरे अंदर वह कला नहीँ आ पा रही है जिससे वह समझ सकता था। यह ज्ञानियों की सोच है, अज्ञानियों की नहीँ ज्ञान चक्षु से देखने की जरूरत है मात्र चक्षु से नहीँ। यदि बाहर-बाहर ही देखता रहा,तो कभी भी शांति का वेदन नहीँ कर सकता है। सब कुछ करो उपदेश भी दो, कोई बात नहीँ, पर इस दृष्टि से नहीँ कि हमारी बात सभी मानें। यदि ऐसी भावना रही तो तू स्वंय को आसक्त कर लेगा।निमित्त बनो पर।

ॐ नमः सिद्वेभ्यः विशुद्ध वचन आत्म बोध से पेज 21 से
विश्व वन्दनीय, वर्त्तमान के वर्धमान, धर्मप्रभाकर, आगम उपदेष्टा, प्रतिपल, प्रतिक्षण स्मरणीय, चर्या शिरोमणी, युग शिरोमणी आचार्य श्री १०८ विशुद्धसागर जी महामुनिराज सहित तीन कम नौ करोड़ मुनिराजो के में नमोस्तु, नमोस्तु, नमोस्तु ।

हे श्रावको स्वाध्याय करो "स्वाध्याय ही परम् तप है" !!!
जय जिनेन्द्र
नमोस्तु शासन सेवा समिति
मैत्री भाव जगत में मेरा, सब जीवों पर नित्य रहे ....।।
साभार: राजेश जैन झाँसी