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एक मंदिर के दरवाज़े

बहुत सुन्दर शब्द जो एक मंदिर के दरवाज़े पर लिखे थे। 
❝सेवा करनी है तो - घड़ी मत देखो❞

❝प्रसाद लेना है तो - स्वाद मत देखो❞
❝सत्संग सुनाना है तो - जगह मत देखो❞
❝बिनती करनी है तो - स्वार्थ मत देखो❞
❝समर्पण करना है तो - खर्चा मत देखो❞
❝रहमत देखनी है तो - जरूरत मत देखो❞

❝जीत❞ किसके लिए, ❝हार❞ किसके लिए,

❝ज़िंदगी भर❞ ये ❝तकरार❞ किसके लिए, 
जो भी ❝आया है वो ❝जायेगा❞ एक दिन यहाँ से,
फिर ये ❝इंसान❞ को इतना ❝अहंकार❞ किसके लिए। 

जय जिनेन्द्र

माला से मोती तुम तोड़ा ना करो
जैन धर्म से मुँह मोड़ा ना करो
बहुत कीमती हैं ये गुरुओ की वाणी
जय जिनेन्द्र बोलना कभी छोड़ा ना करो।

अतीत का गुणगान

अपने अतीत का गुणगान करना
एवं 
वर्तमान पर विलाप करना
मनुष्यों की प्रकृति होती है।

इसका कोई मोल नही

गुरु चरणों से बढकर जग में चीज कोई अनमोल नहीं
हर वस्तु का मोल हैं लेकिन इसका कोई मोल नही।
नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु गुरुदेव

वाणी की शक्ति

वाणी में भी अजीब शक्ति होती है,
कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता
और मीता बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है।


अपना रास्ता

अपना रास्ता बनाने से पहले
आपको कई वर्षो तक
दूसरों के बनाये रास्ते पर ही चलना होता हैं। 
#एककटुसत्य

आधा जीना और मरना


जीना हो तो पूरा जीना,
मरना हो तो पूरा मारना,
बहुत बड़ा कष्ट जगत में,
आधा जीना और आधा मरना !

जरा सोचिये ?

पहले दरवाजे के बाहर लिखा जाता था
अतिथि देवों भव
फिर लिखा जाने लगा
शुभ लाभ
अब लिखा जाता हैं
कुत्तों से सावधान
जरा सोचिये ?
हम किस तरफ बढ़ रहे हैं !

काल में इतनी शक्ति हैं

किसी भी मनुष्य की वर्तमान स्थिति देखकर
उसके भविष्य का मजाक मत उड़ाओ।
क्योंकि काल में इतनी शक्ति हैं
कि वो एक साधारण से कोयले को भी धीरे-धीरे हीरे में बदल देता हैं।

सम्मान

श्रध्दा जान देती है
नम्रता मान देती है
योग्यता स्थान देती है
तीनों मिल जाएं तो सम्मान देती हैं। 
- जैनम्

जीवन नाम हैं

खाने और सोने का नाम जीवन नहीं हैं,
जीवन नाम हैं 
सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का !

केवल पैसा

जिस मनुष्य के पास केवल पैसा है,
उस मनुष्य से ज्यादा गरीब इस दुनिया में कोई नहीं है।

किसकी कीमत ज्यादा

इस जहाँ में,
मैं किसकी कीमत ज्यादा समझूँ
हे प्रभू तुम मिट्टी से इंसान को बनाते हो
और इंसान मिट्टी से तुम्हे !

समस्याओं

शिकायत करके समस्याओं से बचा नहीं जा सकता,
किन्तु
जिम्मेदारी उठकर समस्याओं को कम जरूर किया जा सकता हैं !

कौन क्या कहता हैं

घडी
समय मत गँवाओ !
समुद्र
विशाल दिल रखो !
चींटी
निरंतर कर्म करते रहो !
वृक्ष
परोपकारी बनो !
धरती
सहनशील बनो !
सूर्य
निरंतरता बनाये रखो !
गुलाब
दुःख में भी खुश रखो !
दीपक
दूसरो को रोशन करो !
कुत्ता
वफादार बनो !
कोयल
मीठा बोलो !
कौआ
चतुर बनो !
और
जैन धर्म
अहिंसक बनो !