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जैन परंपरा में दीपावली का दिन 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष (निर्वाण) कल्याणक के रूप में अत्यंत श्रद्धा और पवित्रता के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर जैन समाज भौतिक तड़क-भड़क और पटाखों के स्थान पर आत्म-कल्याण, जप और तप की आराधना करता है। मोक्ष कल्याणक (दीपावली) की जैन पूजन विधि जैन शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या की सुबह (प्रत्युष बेला) में भगवान महावीर को पावापुरी नगरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इसलिए जैन घरों और मंदिरों में सुबह के समय ही मुख्य पूजा संपन्न की जाती है: प्रातःकाल देव दर्शन और अभिषेक: श्रावक-श्राविकाएं सुबह जल्दी स्नानादि करके पवित्र व सादे वस्त्र (अथवा पूजन के धोती-दुपट्टा) पहनकर जिनालय (जैन मंदिर) जाते हैं। मंदिर जी में वेदी पर भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का जल, चंदन और केसर से मंगल अभिषेक व शांतिधारा की जाती है। अष्टद्रव्य से पूजन: वेदी के समक्ष बैठकर भगवान महावीर स्वामी की विशेष देव-शास्त्र-गुरु पूजन और मोक्ष कल्याणक की जयमाला व अर्घ्य समर्पित किया जाता है। पूजा में जल, चंदन, अक्षत, पुष्प,...