Skip to main content

Posts

Recent posts

पूज्य मुनिश्री 108 अजितसागर जी महाराज: संक्षिप्त जीवन परिचय, दीक्षा यात्रा एवं प्रमुख साहित्य सृजन

संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती, प्रखर वक्ता, कुशल साहित्यकार एवं आगम-अध्यात्म के गंभीर अध्येता पूज्य मुनिश्री १०८ अजितसागर जी महाराज की जीवन यात्रा वैराग्य, गुरु-समर्पण और निरंतर ज्ञान-साधना का एक अनुपम उदाहरण है। संक्षिप्त जीवन-वृत्त (एक नज़र में) पूर्व नाम: बाल ब्रह्मचारी विनोद जी जैन जन्म दिवस: 17 अप्रैल 1968 (वैशाख कृष्ण पंचमी, विक्रम संवत 2025, बुधवार, प्रातः 4:30 बजे) जन्म स्थान: सिमरिया (गढ़ाकोटा), जिला-सागर (मध्य प्रदेश) माता-पिता: श्रीमती ताराबाई जी एवं श्री कोमलचन्द जी जैन परिवार: ज्येष्ठ भ्राता श्री भागचंद जी, अनुज श्री बालचंद जी; तीन बहनें (श्रीमती मालती जी, श्रीमती ममता जी, श्रीमती राजुल जी) लौकिक शिक्षा: आठवीं कक्षा तक धार्मिक शिक्षा: गुरु चरणों में आगम, न्याय, सिद्धांत एवं अध्यात्म का गहन स्वाध्याय आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत: 27 दिसम्बर 1987, क्षेत्रपाल जी (ललितपुर, उप्र) गृहत्याग: नवम्बर 1988 (आचार्यश्री के आशीर्वाद से) प्रतिमा व्रत: द्वितीय प्रतिमा: 15 जून 1989 (श्री धर्मनाथ मो...

श्री महावीर जी (करौली, राजस्थान): दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र का अलौकिक इतिहास और गौरवशाली गाथा

राजस्थान के करौली जिले में गंभीरी नदी के तट पर स्थित श्री महावीर जी देश के सबसे प्रमुख और श्रद्धा से परिपूर्ण दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्रों में से एक है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को समर्पित यह पवित्र तीर्थ अपनी चमत्कारी घटनाओं, अनूठी परंपराओं और भव्य वास्तुकला के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इतिहास और अलौकिक प्रकटीकरण (Divine Discovery) प्राचीन मूलनायक प्रतिमा: मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान मूलनायक प्रतिमा भगवान महावीर स्वामी की है। भूरे-तांबे (Copper-colored) रंग की यह सुंदर प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में विराजमान है, जो ऐतिहासिक अनुमान के अनुसार 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन और पाषाण (বালू पत्थर/Sandstone) से निर्मित है। सुरक्षा हेतु संरक्षण: इतिहास और मान्यताओं के अनुसार, विदेशी आक्रमणों और क्षेत्रीय अशांति के दौर में जैन प्रतिमाओं को खंडित होने से बचाने के लिए सुरक्षित रूप से भूमिगत या टीलों में संरक्षित किया जाता था। गाय के दूध का चमत्कार (17वीं शताब्दी): सदियों तक यह प्रतिमा चंदनपुर गाँव के पास ए...

बुंदेलखंड (टीकमगढ़) के प्रमुख दिगंबर जैन सिद्ध एवं अतिशय क्षेत्र | Paporaji, Aharji, Bandhaji Jain Tirth Guide

बुंदेलखंड (टीकमगढ़ क्षेत्र) के प्रमुख दिगंबर जैन सिद्ध एवं अतिशय तीर्थ Major Digambar Jain Siddha & Atishay Kshetras (Tikamgarh Region, M.P.) — Guide & Map Verified Locations बुंदेलखंड अंचल (विशेषतः टीकमगढ़ एवं आसपास का क्षेत्र) जैन धर्म की प्राचीन साधना, तपोभूमि और अतिशयकारी तीर्थों के लिए संपूर्ण भारत में विख्यात है। यहाँ पपोराजी, अहारजी, बंधाजी और फलहोड़ी बड़गांव जैसे पावन सिद्ध व अतिशय क्षेत्र स्थित हैं। नीचे इन प्रमुख तीर्थों का संपूर्ण परिचय एवं गूगल मैप लिंक प्रस्तुत है: 1. पपोराजी दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र | Paporaji Digambar Jain Atishay Kshetra स्थान (Location): टीकमगढ़ से लगभग 5 किमी (Near Tikamgarh, M.P.) मूलनायक: भगवान आदिनाथ (1008 Shri Adinath Bhagwan) विशेषता: यह क्षेत्र 100 से अधिक भव्य मंदिरों और प्राचीन भूगर्भ से प्रकट प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और साधनारत है। Google Maps पर देखें 2. श्री दिगंबर जैन सिद्ध/अत...

गुजरात के प्रमुख जैन सिद्ध, साधना एवं अतिशय तीर्थ क्षेत्र सूची (Google Maps सहित) | Jain Tirth of Gujarat

।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। गुजरात प्रांत के पावन जैन सिद्ध, साधना एवं अतिशय क्षेत्र गुजरात की पुण्यधरा तीर्थंकरों की दीक्षा, केवलज्ञान एवं निर्वाण कल्याणकों सहित असंख्य मुनिराजों की मोक्ष स्थली रही है। 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी की पावन दीक्षा, केवलज्ञान व मोक्ष स्थली गिरनार जी , श्री पावागढ़ सिद्ध क्षेत्र, शाश्वत सिद्ध क्षेत्र शत्रुंजय (पालीताणा) , तारंगा जी सिद्ध क्षेत्र एवं महुवा पार्श्वनाथ सहित गुजरात के समस्त प्रमुख तीर्थों की प्रामाणिक सूची एवं Google Maps लिंक यहाँ प्रस्तुत है। क्र. क्षेत्र का नाम (तीर्थ स्थल) प्रकार (Category) धार्मिक महात्म्य / विवरण मैप लिंक 1 भिलोड़ा (Bhiloda) अरावली जिला अतिशय क्षेत्र भगवान दिगंबर नेमिनाथ जी का अति प्राचीन एवं चमत्कारी दिगंबर जिनालय (चन्द्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर) 📍 Map 2 चैतन्यधाम (...

आचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज जीवन परिचय एवं संयम यात्रा | Acharya Shri 108 Samaysagar Ji Maharaj Biography

आचार्य परंपरा की अखंड ज्योति के संवाहक: आचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज आचार्य परंपरा की अखंड ज्योति के संवाहक आचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज का सम्पूर्ण जीवन आत्मसंयम, कठोर साधना और निष्कलंक गुरु-भक्ति की एक दिव्य तपोयात्रा है। उनका प्रत्येक चरण अपने परम पूज्य गुरु संत शिरोमणि आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के सान्निध्य, मार्गदर्शन और करुणा से अनुप्राणित रहा है। जीवन एवं साधना का संक्षिप्त इतिहास 27 अक्टूबर 1958 (आश्विन शुक्ल शरद पूर्णिमा, वीर निर्वाण संवत 2484) को कर्नाटक के सदलगा नामक पावन ग्राम में इस तेजस्वी आत्मा का जन्म हुआ। गृहस्थ अवस्था में आपका नाम श्री शांतिनाथ जी अष्टगे था। बाल्यकाल से ही वैराग्य और आत्मचिंतन आपके व्यक्तित्व में स्पष्ट परिलक्षित था। मात्र सत्रह वर्ष की लघु आयु में, श्री महावीर जी (राजस्थान) की पुण्यधरा पर 02 मई 1975 (वीर निर्वाण संवत 2501) को पूज्य आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज ने आपको आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत प्रदान किया, जिससे आपका जीवन साधना-पथ पर प्रतिष्ठित हुआ। ...

बिहार के प्रमुख जैन सिद्ध एवं अतिशय तीर्थ क्षेत्र सूची (Google Maps सहित) | Jain Tirth of Bihar

।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। बिहार प्रांत के पावन जैन सिद्ध, कल्याणक एवं अतिशय क्षेत्र बिहार की पुण्यभूमि तीर्थंकर भगवान, गणधर देव एवं असंख्य मुनिराजों की तपोभूमि व निर्वाण स्थली रही है। 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म, दीक्षा एवं निर्वाण भूमि पावापुरी, 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के पंचकल्याणक क्षेत्र चम्पापुर-मंदारगिरि, गौतम गणधर की निर्वाण भूमि गुणावाँ जी तथा पंचपहाड़ी राजगीर सहित समस्त प्रमुख तीर्थों की प्रामाणिक सूची एवं Google Maps लिंक यहाँ प्रस्तुत है। क्र. क्षेत्र का नाम (तीर्थ स्थल) प्रकार (Category) धार्मिक महात्म्य / विवरण मैप लिंक 1 आरा (Arrah) भोजपुर जिला अतिशय क्षेत्र प्राचीन जिनालय, अतिशययुक्त प्रतिमाएं एवं सिद्धान्त ग्रंथों की पावन भूमि 📍 Map 2 बासोकुण्ड (Basokund) वैशाली कल्याणक क्षेत्र ...
फीडबैक दें