राजस्थान के करौली जिले में गंभीरी नदी के तट पर स्थित श्री महावीर जी देश के सबसे प्रमुख और श्रद्धा से परिपूर्ण दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्रों में से एक है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को समर्पित यह पवित्र तीर्थ अपनी चमत्कारी घटनाओं, अनूठी परंपराओं और भव्य वास्तुकला के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इतिहास और अलौकिक प्रकटीकरण (Divine Discovery) प्राचीन मूलनायक प्रतिमा: मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में विराजमान मूलनायक प्रतिमा भगवान महावीर स्वामी की है। भूरे-तांबे (Copper-colored) रंग की यह सुंदर प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में विराजमान है, जो ऐतिहासिक अनुमान के अनुसार 1000 वर्ष से अधिक प्राचीन और पाषाण (বালू पत्थर/Sandstone) से निर्मित है। सुरक्षा हेतु संरक्षण: इतिहास और मान्यताओं के अनुसार, विदेशी आक्रमणों और क्षेत्रीय अशांति के दौर में जैन प्रतिमाओं को खंडित होने से बचाने के लिए सुरक्षित रूप से भूमिगत या टीलों में संरक्षित किया जाता था। गाय के दूध का चमत्कार (17वीं शताब्दी): सदियों तक यह प्रतिमा चंदनपुर गाँव के पास ए...