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आप सभी धर्मप्रेमी, श्रद्धालु और जैन धर्म में रुचि रखने वाले साथियों का हार्दिक स्वागत है आयुषी लकी जैन यूट्यूब चैनल पर।

जय जिनेन्द्र! आप सभी धर्मप्रेमी, श्रद्धालु और जैन धर्म में रुचि रखने वाले साथियों का हार्दिक स्वागत है आयुषी लकी जैन चैनल पर। यहाँ हम आपको कराएंगे — 🔸 जैन मंदिरों के पावन दर्शन — देश और विदेश में स्थित प्राचीन व भव्य जैन तीर्थों और जिनालयों की सुंदर झलकियाँ। 🔸 जैन समाज की ताज़ा खबरें और अपडेट — तीर्थयात्राओं, चातुर्मास, प्रवचन, एवं विशेष आयोजनों की जानकारी। 🔸 जैन दर्शन, तत्त्वज्ञान और प्रेरणादायक कथाएँ — जिससे आप अपने जीवन में शांति, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग अपना सकें। 🔸 साक्षात्कार, भजन, आरती, और धार्मिक आयोजन — जो आपके मन और आत्मा को पवित्र भावों से भर देगा। 🌼 आपसे निवेदन 🌼 👉 चैनल को अभी सब्सक्राइब कीजिए। 👉 हर वीडियो को लाइक और शेयर करें ताकि धर्म का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। 👉 और हाँ — बेल आइकन 🔔 दबाना न भूलें, जिससे हमारी हर नई वीडियो की सूचना तुरंत आप तक पहुँचे। आइए, हम सब मिलकर जैन धर्म की महान विरासत को आगे बढ़ाएँ। जय जिनेंद्र!













 

आरोग्य (अमृतादि) काषायम चूर्ण, संशमनी वटी टेबलेट घर पर मंगवाने हेतु।

कोरोना संक्रमण का आयुर्वेदिक उपचार वर्तमान मे फैल रहे कोरोना विषाणु के संक्रमण को रोकने एवं प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से संचालित पूर्णायु आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं अनुसंधान विद्यापीठ जबलपुर, मध्य प्रदेश द्वारा आयुर्वेदिक औषधियाँ तैयार की गई हैं

1. आरोग्य (अमृतादि) कषायम चूर्ण 100 ग्राम पैक मूल्य 150/- रुपया
2. संशमनी वटी 40 टेबलेट पैक मूल्य 120/- रुपया
कोरियर चार्ज अलग से

नोट :- एक सेट में एक व्यक्ति के लिए करीब 20 दिन की औषधि अनुमानित आती है

ये औषधियाँ आप कोरियर द्वारा घर पर मंगा सकते हैं
1.👉 1 सेट 270 ₹ प्लस 90 ₹ कोरियर चार्ज सहित 360 ₹)
2.👉 2 सेट 540 ₹ प्लस 100 ₹ कोरियर चार्ज सहित 640 ₹)
3.👉 3 सेट 810 ₹ प्लस 100 ₹ कोरियर चार्ज सहित 919 ₹)
4.👉 4 सेट 1080 ₹ प्लस 140 ₹ कोरियर चार्ज सहित 1220 ₹)
5.👉 5 सेट 1350 ₹ प्लस 140 कोरियर चार्ज सहित 1490 ₹)

1. सर्व प्रथम नीचे दिए गये अकाउंट नंबर पर अपने सेट के अनुसार भुगतान करे 
2. भुगतान हो जाने के बाद भुगतान की रसीद या स्कीन शॉट नीचे दिए गए व्हाट्सएप्प नंबर पर भेजे 
3. अपना पूरा नाम व पता पिन कोड सहित एवं सेट की संख्या भेजे

NAME: PURNAYU AYURVED CHIKITSALAYA AVAM ANUSANDHAN VIDYA PEETH
A/C NUMBER: 50100288112583
IFSCCODE: HDFC0000224


व्हाट्सएप्प नंबर: +91-95752- 24466


संपर्क
पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय एवम् अनुसंधान विद्यापीठ
श्री दिगंबर जैन संरक्षिणी सभा 657 जवाहर गंज, जबलपुर मध्य प्रदेश – भारत
+91 9575 224466 (General Info.)
poornayuayurved@gmail.com

पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह 2018

पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह का क्रम प्रारम्भ। कुछ स्थानों की हुई तिथि घोषित, अधिकांश स्थानों की घोषणाओं का इंतज़ार बाक़ी।


↬ परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ, अतिशय क्षेत्र खजुराहो जिला छतरपुर मप्र- 29 जुलाई, रविवार दोपहर 1:30 बजे से । 
↬ पूज्य मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ससंघ का पावन वर्षायोग 2018, आंवाजी राजस्थान - 26 जुलाई, गुरूवार दोपहर 1:30 बजे से।  
↬ पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ, रतलाम मप्र- 29 जुलाई, रविवार, दोपहर 1:30 बजे से।
↬ पूज्य मुनिश्री सुख सागर जी महाराज, स्थान-हीरे अंग्रोली, तहसील- खानापुर, जिला- बेलगाम, कर्नाटक- 29 जुलाई।
↬ पूज्य मुनि श्री 108 विमल सागर जी महाराज ससंघ, गौरझामर जिला सागर (म.प्र) - 26 जुलाई, गुरूवार दोपहर 1:30 बजे से। 
↬ वन्दनीय आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ससंघ, झाँसी उप्र- 29 जुलाई, रविवार, प्रातः 8:30 बजे।

निरंतर अपडेट होने वाला पहला जैन ब्लॉग संपूर्ण पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह 2018 की जानकारियों के लिए निरंतर पढ़ते रहिए।https://isupportjainism.blogspot.com 
सूचनाप्रदाता: अखिल भारतीय गुरुवर संघ 

भूमि से प्राप्त हुई थी 9 वी शताब्दी

जबलपुर। त्रिपुर सुन्दरी मंदिर से प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा कुछ दिनो पूर्व भूमि से प्राप्त हुई थी 9 वी शताब्दी की यह प्रतिमा अभी त्रिपुर सुन्दरी मंदिर में रखी है जिसपर प्रशासन ने कब्जा कर रखा है, जबलपुर के आसपास 1 लाख से अधिक की जैन समाज है पर अभी तक प्रतिमा प्राप्ति के लिए समाज प्रशासन पर किसी तरह का दबाव नहीं बना रही यह आश्चर्यजनक है। 
कुछ समय पूर्व ही खण्डेला, सीकर के पास मिली मूर्ति जब प्रशासन ने अपने कब्जे में ली तब समाज की जागृति व विश्व जैन संगठन द्वारा किए प्रयास की वजह से प्रतिमा समाज को देने के लिए प्रशासन तैयार हुआ, अगर जबलपुर की जैन समाज प्रयास न करेगी तो 2-3 दिन में जब मूर्ति संग्रहालय में चली जाएगी तब उसके मिलने की जो संभावना है वह भी खत्म हो जाएगी समाज को प्रतिमा प्राप्ति के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करना चाहिए अन्यथा यह विशाल व मनमोहक जिनबिम्ब सदा के लिए संग्रहालय में कैद हो जाएंगे। हमारे पूर्वजो ने विशाल जिनालय बनवाएं और उनमें प्रतिमाएँ स्थापित करवाई लेकिन हमारी उदासीनता के चलते आज हमारी विरासत दूसरे लोगो के पास जा रही है, समाज को त्वरित बैठक आहूत करके आन्दोलन की घोषणा करनी चाहिए ताकि प्रतिमा जिनालय में विराजित हो।

साभार: पीयूष जैन, सागर 

पूज्य गुरुदेव के बढ़ते कदम...

11 अप्रैल, बुधवार। 
परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार- 
आज का रात्रि विश्राम- लखनपुरा (8 किमी), 
कल की आहार चर्या- मरुताल (9 किमी) दमोह यहाँ से मात्र 4 किमी। 


सूचना प्रदाता: शुभान्शु जैन दमोह 

GOD BAHUBALI MAHAMASTAKABHISHEKA 2018


Shravanabelagola is a small township located 51 km (32 miles) southeast of Hassan District in the state of Karnataka, which sits at an altitude of about 3,350 feet above sea level. There are excellent roads to Shravanabelagola from both Bangalore and Mysore. The nearest airport is in Bangalore, at a distance of 157 km (98 miles) and the nearest railway station is in Shravanabelagola.

Nearby Main Cities

Hassan-51 KM / 32 Miles
Mysore-95 KM / 60 Miles
Bangalore-157 KM / 98 Miles
Mangalore-227 KM / 142 Miles

दुनिया की सबसे बडी क्वार्ट्ज क्रिस्टल (स्फटिक) की प्रतिमा जी


सागर। बुंदेलखंड के संभागीय मुख्यालय सागर में सिद्धायतन की सिद्ध भगवान की प्रतिमा गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कर ली गई है। गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्र में दुनिया की सबसे बडी क्वार्ट्ज क्रिस्टल (स्फटिक) की प्रतिमा की उंचाई 32.5 इंच एवं चौड़ाई 24 इंच है। प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के बाद आज सिद्धायतन में ब्रह्मचारी डी. राकेश भैया की उपस्थिति में डाॅ. हरीसिंह गौर विद्यालय के भूगर्भ शास्त्र के प्रोफेसर्स द्वारा पत्रकारों से चर्चा के दौरान उपलब्धि को सांझा किया। प्रो. अरुण कुमार शांडिल्य ने बताया कि सिंगल क्रिस्टल से बनी दुनिया की एकमात्र प्रतिमा है। जो पाषाण से प्रतिमा बनने के बाद 130 किलो वजनी है। जिसके मूर्ति प्रदाता सागर के ही प्रमोद वारदाना है। लगभग 18 माह में प्रतिमा तैयार हुई। जिसके बाद सागर में पिछले वर्ष अप्रैल माह में पंचकल्याणक महापूजन का आयोजन किया गया था। राकेश भैया ने बताया कि सिद्ध भगवान के बारे में बताया कि सिद्ध भगवान निर्विकल्प होते हैं। निराकार जैसा कोई आकार नहीं। जैन आगम में अभिषेक बिंब का होता है। मूलनायक के रूप में सिद्ध भगवान का स्वतंत्र दुनिया का प्रथम मंदिर है। सिद्ध भगवान के सामने बैठकर ध्यान लगाने से कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने बताया कि अभी तक सिद्ध भगवान की इंदौर में 14 इंच की, चमत्कारजी में 5 इंच की, फिरोजाबाद में 10 इंच, गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर सागर में 17 इंच की स्फटिक मूर्तियां विराजमान की गई हैं। जबकि गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में 12 बाई 12 इंच की दर्ज है।
11 क्विंटल की स्फटिक शिला 18 माह तराशी गई तब बनी सिद्ध भगवान की प्रतिमा, 51 इंच लंबे एवं ढाई मीटर व्यास वाले पत्थर को जयपुर में तराश गया, पिछले साल हुई थी प्रतिष्ठित, एक साथ 5 रंगों में दिखेगी।

स्ट्रांग रूम जैसी सुरक्षा, दर्शनों का समय फिक्स 
स्फटिक की प्रतिमा की सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर में दर्शन के लिए सुबह 7 से 11 बजे और शाम 6 से 8.30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। साथ ही बैंकों में स्ट्रांग रूम जैसी सुरक्षा व्यवस्था मंदिर में है। भूगर्भ शास्त्री प्रो. एच थामस ने बताया कि स्फटिक नाम का पत्थर करोड़ों वर्ष में तैयार होता है। वहीं विभागाध्यक्ष प्रो. आर के रावत ने स्फटिक की विशेषताएं बताते हुए कहा कि यह कांच के समान पारदर्शी होता है। 
पांच सदस्यीय समिति  ने भेजी थी रिपोर्ट 
प्रो. एल पी चौरसिया ने बताया कि गिनीज बुक रिकार्ड में दर्ज होने के पहले पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी। जिसके द्वारा क्रिस्टल का सूक्ष्मता से परीक्षण के बाद रिपोर्ट भेजी गई थी। ब्रह्मचारी राकेश भैया ने बताया कि आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित नेल्लूर की खदान से 51 इंच लंबा 2.5 मीटर व्यास वाला लगभग 1100 किलोग्राम वजन का सफेद स्फटिक पाषाण प्राप्त हुआ था। जहां से लंबी दूरी तय कर लगभग 6 माह में यह पाषाण शिला जयपुर पहुंची थी। जयपुर की अधिकृत जेम टेस्टिंग लेब भारत जेम्स टेस्टिंग लेब के द्वारा परीक्षण किया गया था। इसके साथ ही विवि के भू-गर्भ शास्त्रियों ने व्यवहारिक परीक्षण के बाद पाषाण से बिंब निर्माण का निर्णय लिया गया था।

जैन समाज चेते कही देर न हो जाये

"सम्मेदशिखरजी का भविष्य"


जैन जगत के सभी श्रेष्ठीजनों से करबद्ध अपील:-
1-श्रावण मास में प्रतिदिन हजारों काॅवडिया पारसनाथ टोंक पर जल फूल पत्ती भांग धतूरा नारियल चढाने लगे हैं। 
2-हमारे पुजारी उन्हें रोकने में असमथॅ हैं कई कारणों से। 
3-पूवॅ मुख्यम॔त्री झारखंड पूरे पवॅत को आदिवासियों के गुरु का स्थान अधिकारपूवॅक घोषित कर चुके हैं व आदिवासियो को हक के लिए भडकाते हैं। 
4-न्यायालय के निणॅय के अनुसार हम जैनों का (सभी जैनों का) स्वामित्व सिफॅ 24 टोकों की 0,86 एकड भूमि पर है शेष पूरा पवॅत वन विभाग का है। 
क्या हम उस दिन की कल्पना करें जब हमें वंदना करने के लिए शासन अनुमति लेनी पडेगी या फिर आदिवासियों के विरोध के कारण सशस्त्र बलों की सुरक्षा में वंदना को बाध्य होना पडेगा।
या फिर पारसनाथ भगवान की जय बोलने पर डंडे का प्रहार " गिरनारजी की तरह झेलना पडेगा ?
या फिर केशरियाजी की तरह हिंसात्मक घटना का कडवा घूंट पीना पडेगा ?
या फिर अंतरीक्ष पाश्वॅनाथ-सिरपुर की तरह सामाजिक द्वंद का अंतहीन दंश सहने को बाध्य होना पडेगा ?
यदि अभी भी सम्पूर्ण जैन नहीं जागा तो कब जागेगा। 
सभी पंथों के पदाधिकारियों की अजेॅट बैठक आहूत कर, समस्या के निदान हेतु आवश्यक कायॅवाही अपरिहार्य है।जिसमें झारखंड प्रशासन /मंत्रालय को अवगत कराने से लेकर मधुवन ऐवं पवॅत /टोकों की वंदना पूजन के जैनों के शास्वत अधिकारों की रक्षा धनबल, जनबल, राजनैतिक बल से सुरक्षित करना है।शिखरजी पवॅत पर उपलब्ध जमीन के टुकडों को भविष्य के लिए खरीदना भी सामयिक होगा।
तीथॅक्षेत्र कमेटी को पहल करनी ही होगी यदि शिखरजी को बचाना है तो।


जय जिनेन्द्र
आपका
सुधीर जैन
साभार: पीयूष जैन, इंदौर
18 जुलाई 17
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मन की शांति के लिए छोड़ दिया 1 करोड़ का पैकेज

उपभोक्तावाद संस्कृति की चकाचौंध में जहां युवा लाखों और करोड़ों रुपये के पैकेज की ओर भाग रहे हैं। एशो-आराम और भौतिक वस्तुओं की चाह में रात-दिन एक किए हुए हैं। वहीं एक ऐसा भी युवा है, जिसने आत्म उत्थान और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए एक करोड़ रुपये के पैकेज को पलभर में त्याग दिया। यह शख्स है शैलेष जैन, जो अब दिगंबर मुद्रा धारण कर मुनि श्री वीर सागर महाराज बने। उन्होंने प.पू आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज से दीक्षा ग्रहण की। मुनि श्री वीर सागर यहां हांसी में दो दिगंबर जैन मुनियों के साथ ससंघ चातुर्मास कर रहे हैं। वर्ष 2004 में वीर सागर महाराज बॉम्बे के स्टॉक एक्सचेंज में कन्सलटेंट फर्म में सर्विस पर थे। तब वह एक करोड़ रुपये के सालाना पैकेज पर कार्य कर रहे थे। वहीं उनके छोटे भाई निलेश जैन बॉम्बे में रिलायंस जियो के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट हैं। वर्ष 1994 में नागपुर से शैलेष ने केमिकल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए इन फाइनेंस और चार्टर्ड फाइनेंशियल अकाउंटेट (सीएफए) किया। इसके बाद वह बॉम्बे में एक कन्सलटेंट फर्म में सर्विस पर लगे। 31 वर्ष की आयु में उन्हें वैराग्य हुआ और आत्म उत्थान की लगन जगी। उन्होंने बताया कि जीवन में हर कार्य का सही समय आता है। अपनी पढ़ाई पूरी करने और कुछ साल सर्विस करने के बाद जब उन्हें लगा कि यह सही समय है, जब धर्म और गुरु से जुड़कर शाश्वत जीवन को अपनाया जाए। इसके बाद उन्होंने सब कुछ त्याग दिया। भारतीय संस्कृति की रक्षा और आत्मा के विकास के लिए उन्होंने जैन दीक्षा ले ली। हालांकि वे बचपन से ही आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से प्रभावित थे।
साभार: छोटू जैन, हरियाणा
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विदेश से 1 करोड़ का पैकेज छोड़ा, आज चला रहे हैं हथकरघा केंद्र:

न्यूयार्क सिटी से छोड़ी नौकरी लौटे देश, मध्य-प्रदेश के अशोकनगर निवासी अमित जैन ने मैकेनिकल इंजीनियर आईआईटी दिल्ली से की। इसके बाद वह अमेरिका की न्यूयार्क सिटी में एक फाइनेंसियल कंपनी डिलॉइट में एक करोड़ से अधिक के पैकेज पर कार्यरत थे। इस दौरान वे आचार्यश्री के संदेश को याद करते रहे और बाद मे यह समझते हुए कि जिस देश की शिक्षा ली उसका ज्यादा से ज्यादा फायदा देश में ही समाज की भलाई हो सके, वापस आ गए। यहां आचार्यश्री के मार्गदर्शन में टीम बनी और हथकरघा उद्योग शुरू किया गया। उनके साथ दर्जन भर से अधिक ऐसे युवा हैं जो भी लाखों रुपये के पैकेज और पोस्ट छोड़कर इस कार्य में लगे गए हैं।
  • इंडिया नहीं सिर्फ भारत
  • गौ हत्या बंद करो, पशुधन बचाओ देश बचाओ
  • हथकरघा के वस्त्र अपनाओ, स्वदेशी पहनो, स्वावलंबन लाओ

जैनम् जयतु शासनम्, वंदे विधा सागरम्

आचार्य भगवन एवं श्रीसंघ की समस्त जानकारियों के लिये फेसबुक पेज से अवश्य जुडें। क्लिक करे 👉 आईसपोर्टजैनिज़्म
साभार: श्री अमर जैन, गुना

आचार्य श्री जी का हुआ मंगल विहार

अनियत विहारी आराध्य परमेष्टि गुरुदेव श्री मद आचार्य देव श्री १०८ विद्यासागर जी महामुनिराज जी का ससंघ चंद्रगिरि तीर्थ डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ से । 


चातुर्मास 2017 सूची ( घोषित व संभावित)

आचार्य श्री कुंथुसागर जी – कुंथुगिरी, महा.
आचार्य श्री संभव सागर जी – त्रियोगी आश्रम, सम्मेद शिखर जी, झार.
आचार्य श्री निर्मल सागर जी – गिरनार जी, गुज.
आचार्य श्री विराग सागर जी – कवि नगर, गाज़ियाबाद (उ.प्र.)
आचार्य श्री विमल सागर जी – कमल मंदिर, महावीर जी (राज.)
आचार्य श्री अनुभवनंदी जी – विकास नगर, लोनी (उ.प्र.)
आचार्य श्री विद्यानन्द जी – कुन्दकुन्द भारती, दिल्ली
आचार्य श्री आनंद सागर जी – ध्यान तीर्थ, वसंत कुंज, दिल्ली
आचार्य श्री प्रसन्न ऋषि जी – इंदौर, म.प्र.
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी – श्रवणबेलगोला, कर्ना.
आचार्य श्री गुणधर नंदी जी – नवग्रहतीर्थ, वरूर, कर्ना.
आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी – पुष्पगिरी, म.प्र.
आचार्य श्री पार्श्वसागर जी – द्रोणगिरि , म.प्र.
आचार्य श्री श्रुतसागर जी – जनकपुरी, दिल्ली
आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी – बेला तीर्थ, दमोह (म.प्र.)
आचार्य श्री शशांक सागर जी – साधु सेवा तीर्थ, पदमपुरा (राज.)
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी – कंचन बाग, इंदौर (म.प्र.)
आचार्य श्री प्रज्ञ सागर जी – द्वारिका, दिल्ली
आचार्य सौभाग्य सागर जी (सिद्धांत सागर जी) – भोगल, दिल्ली
आचार्य श्री ज्ञान भूषण जी – फ़िरोज़पुर झिरखा, हरियाणा
आचार्य श्री विशद सागर जी – गुरुग्राम (हरि.)
आचार्य श्री कुशाग्रनंदी जी – मुम्बई (महा.)
आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी – मृत्युंजय तीर्थ, इटावा (उ.प्र.)
आचार्य श्री ज्ञान सागर जी – वहलना (उ.प्र.)
आचार्य श्री सम्मान सागर जी – कानपुर (उ.प्र.)
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एलाचार्य श्री अतिवीर जी – दिल्ली
एलाचार्य श्री त्रिलोक भूषण जी – बड़ागांव (उ.प्र.)
एलाचार्य श्री प्रभावना भूषण जी – बड़ागांव (उ.प्र.)
उपाध्याय श्री गुप्तिसागर जी – गुप्तिधाम, गन्नौर (हरि.)
उपाध्याय श्री अनुभव सागर जी – गुजरात
मुनि श्री तरुण सागर जी – सीकर (राज.)
मुनि श्री पुलक सागर जी – बारामती (महा.)
मुनि श्री नमी सागर जी – जय शांतिसागर निकेतन, मंडोला (उ.प्र.)
मुनि श्री नमोस्तु सागर जी – पुन्यस्थली, मुरादनगर (उ.प्र.)
मुनि श्री अनुमान सागर जी – बड़ौत (उ.प्र.)
मुनि श्री संकल्प भूषण जी – शांति मोहल्ला, दिल्ली
मुनि श्री प्रसन्न सागर जी – पदमपुरा (राज.)
मुनि श्री गुणभूषण जी – पलवल, हरियाणा
मुनि श्री प्रबल सागर जी – महाराष्ट्र
मुनि श्री सुधा सागर जी – राजस्थान
मुनि श्री प्रमाण सागर जी – राजस्थान
मुनि श्री सौरभ सागर जी – दिल्ली
मुनि श्री सुरत्नसागर जी – राधेपुरी, दिल्ली
मुनि श्री अमोघ कीर्ति जी – मुम्बई (महा.)
मुनि श्री अमित सागर जी – कर्नाटक
मुनि श्री चिन्मयानंद सागर जी – महावीर जी (राज.)
मुनि श्री सुबल सागर जी – जयपुर (राज.)
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गणिनी आर्यिका श्री चन्द्रमती दक्षमति माताजी – राजा बाजार (दिल्ली)
गणिनी आर्यिका श्री विद्याश्री विधा श्री माताजी – हस्तिनापुर (उ.प्र.)
गणिनी आर्यिका श्री शुभमति माताजी – सूरत (गुज.)
गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती जी – मुम्बई (महा.)
गणिनी आर्यिका श्री विज्ञाश्री जी – राजस्थान
गणिनी आर्यिका श्री विशुद्ध मति जी – जयपुर (राज.)
गणिनी आर्यिका श्री यशस्विनी माताजी – जयपुर (राज.)
गणिनी आर्यिका श्री गौरवमति जी – जयपुर (राज.)
आर्यिका श्री चन्द्रमती माताजी – बड़ागांव (उ.प्र.)
गणिनी आर्यिका श्री सरस्वती माताजी – निर्भय एन्क्लेव (खेकड़ा, उ.प्र.)
आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण जी – जहाजपुर (राज.)
आर्यिका श्री प्रत्यक्षमति माताजी – बड़ौत (उ.प्र.)
आर्यिका श्री दृष्टि भूषण जी – भोलानाथ नगर, दिल्ली
आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जी – भीलवाड़ा, राज.
ऐलक श्री विजय भूषण जी – बंथला (उ.प्र.)
क्षुल्लक श्री तारण सागर जी – हस्तिनापुर (उ.प्र.)
क्षुल्लिका श्री ज्ञानमोती माताजी – त्यागी आश्रम , बड़ागांव (उ.प्र.)
क्षुल्लिका श्री पूजाभूषण भक्ति भूषण माताजी – सोनागिर (म.प्र.)

⇛उक्त स्थानों में परिवर्तन भी संभावित है।
सूचनाप्रदाता: पीयूष जैन 

सांगानेरजी: आचार्य श्री एवं ससंघ के लिए विशेष विमान से आज का गंधोदक

सांगानेरजी। भूगर्भ से निकले यक्ष-रक्षित जिनविम्वों जिनालय का अभिषेक (गंधोदक) एवं आज की शांतिधारा आचार्य श्री एवं समस्त मुनि/ आर्यिका संघ एवं समस्त ब्रम्हचारी प्रतिभास्थली हथकरधा समस्त मानवजाति के नाम से हुई जिसका (गंधोदक) आचार्य श्री एवं ससंघ के लिए विशेष विमान से श्री अशोक जी पाटनी द्वारा चंदगिरि डोगरगढ़ जा रहा हैं , विमान सीधे डोंगरगढ़ में उतरेगा ! 

नोट: अगर आपके पास भी गुरुदेव से जुडी कोई भी जानकारियाँ हो तो हमसे जरुर साँझा करे। 📧 ईमेल: infoissupport@gmail.com
साभार : एल.एस.आर परिवार 

कोटा में तैयार हुई आचार्य श्री की पेंटिंग

कोटा।आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के 50 वें मुनिदीक्षा दिवस आषाढ़ शुक्ल पंचमी (28 जून 2017) के शुभावसर पर देश विदेशों में संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है इसी श्रंखला में कोटा शहर में आचार्य श्री का एक हस्तनिर्मित चित्र तैयार किया गया है जिसके निर्माण में चित्रकार को लगभग 25 दिन से भी अधिक समय लगा उक्त पेंटिंग डोंगरगढ़ के अलावा विभिन्न नगरों में विराजमान उपसंघो के समक्ष जाएगी। साथ ही देश के महानगरों में आयोजित आर्ट गैलरी में प्रदर्शित होगी।
                      पेंटिंग में जहाँ आचार्यश्री तप साधना में लीन दिख रहे है वही.उनके पीछे संयम कीर्ति स्तम्भ भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
                             पेंटिंग की विदाई के मौके पर चित्रकार की आंखों से छलके आँसु आचार्य श्री के चित्र को तैयार कर रहे सुरेंद्र वर्मा ने दिनरात लगन और श्रम से जब इसको तैयार किया तो लेने पहुंचे गुरुभक्तों को ये तस्वीर सौंपते समय चित्रकार की आंखे छलक गई।
मेरा अनुभव
पेंटिंग को तैयार होने के बाद मैं मनोज जैन आदिनाथ जब चित्रकार के पास पहुंचा और चित्रकार सुरेंद्र वर्मा ने मुझे चित्र सौंपा तो उनकी माता पिता एवं परिवारजनों ने चित्र के दर्शन कर अपने आप को सौभाग्यशाली माना और कहा कि इस चित्र को बनाते समय सदैव एक शुभ स्पंदन बना रहता था और जब मैं गुरुजी की तश्वीर बनाने में इतना आनंदित हूँ तो साक्षात दर्शन पाकर कितना आनंदित होऊंगा कह पाने के लिए भी शब्द कम पड़ते दिख रहें है।
सूचनाप्रदाता: मनोज जैन 'आदिनाथ' कोटा।

ब्रेकिंग न्यूज़: शुभ संकेत


चंद्रगिरि। प.पू आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज दे सकते हैं, बाल ब्रह्मचरियों को जैनेश्वरी मुनि दीक्षा।

                 आचार्य श्री विद्यासागर जी महायतिराज ससंघ चंद्रगिरि डोंगरगढ़ शुभ क्षेत्र में विराजित है विश्व भर के भक्तों के अनन्त पुण्य के उदय से एवं कई ब्रह्मचारी भैया जी के चलते चंद्रगिरि पहुँचने से ऐसे शुभ संकेत मिल रहे की जैसे हो सकती हैं भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएँ। इसी अनुमान पर आचार्य श्री के सानिध्य में भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएँ होने की संभावना है तिथि/संख्याएँ अभी कोई निश्चित नहीं हैं, लोग सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं हम सब लोग भावना भाए कि त्रैलोक्य के कल्याणार्थ बाल ब्रह्मचारी पिच्छिधारी श्रमणों का नवागमन हो। 
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नोट: इस संदेश को अभी पक्का नहीं माने, ये सम्भावना मात्र हैं। क्योंकि जिस तरह आचार्य श्री बिना बताए विहार कर जाते है, उसी तरह दीक्षा के बारे में गोपनीयता रखते है यह तो अंदाजा लगाया जा रहा है अब तक ऐसी कोई भी घोषणा आचार्य भगवन द्वारा नहीं की गई हैं। 

जाप: ओम ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं बड़े बाबा अर्हम् नमः छोटे बाबा नमो नमः
साभार: श्रीमति गोलू जैन, छत्तीसगढ़