भगवान मूर्तियों या मंदिरो में नहीं है ! भगवान हमारी अनुभूति में ही विराजमान है ! हमारी आत्मा ही भगवान का मंदिर है ! सभी के शरीर में आत्मा रुपी मंदिर में अनुभूति रुपी भगवान विराजमान रहते है ! बस इंसान इन्हे महसूस नहीं कर पाता और दुनिया भर में खोजता रहता है जबकि भगवान हमारे अंदर ही मौजूद हैं !