।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। सादर जय जिनेन्द्र! 'आई सपोर्ट जैनिज़्म' पर समस्त सामग्री विशुद्ध जिनधर्म प्रभावना के उद्देश्य से समर्पित है। जिनवाणी का सम्मान सर्वोपरि है; कृपया इसे पूर्ण विनय एवं सात्विक भाव से अवलोकन करें।
।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं बड़े बाबा अर्हं नमः ।।

श्री मुनिसुव्रतनाथ जी की आरती

ऊँ जय मुनिसुव्रतस्वामी, प्रभु जय मुनिसुव्रतस्वामी |
भक्ति भाव से प्रणमूं, जय अंतरयामी || ऊँ जय.
राजगृही में जन्म लिया प्रभु, आनन्द भयो भारी |
सुर नर-मुनि गुण गाएँ, आरती कर थारी || ऊँ जय.
पिता तिहारे, सुमित्र राजा, शामा के जाया |
श्यामवर्ण मूरत तेरी, पैठण में अतिशय दर्शाया ||ऊँ जय.
जो ध्यावे सुख& पावे, सब संकट दूर करें |
मन वांछित फल पावे, जो प्रभु चरण धरें || ऊँ जय.
जन्म मरण, दुख हरो प्रभु, सब पाप मिटे मेरे |
ऐसी कृपा करो प्रभु, हम दास रहें तेरे || ऊँ जय.
निजगुण ज्ञान का, दीपक ले आरती करुं थारी |
सम्यग्ज्ञान दो सबको, जय त्रिभुवन के स्वामी || ऊँ जय.