।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। सादर जय जिनेन्द्र! 'आई सपोर्ट जैनिज़्म' पर समस्त सामग्री विशुद्ध जिनधर्म प्रभावना के उद्देश्य से समर्पित है। जिनवाणी का सम्मान सर्वोपरि है; कृपया इसे पूर्ण विनय एवं सात्विक भाव से अवलोकन करें।
।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं बड़े बाबा अर्हं नमः ।।

मुनि क्षमासागर

सूरज ने कहा- अपने द्वार खोलो मेरी रोशनी तुम्हारी होगी।
वृक्षों ने कहा- मेरे करीब बैठो मेरी छाया तुम्हारी होगी।
नदियों ने कहा- मेरे किनारे आकर हाथ बढ़ाओ मेरी बहती धारा तुम्हारी होगी। मैंने ऐसा ही किया अब रोशनी मेरी है छाया भी मेरी है मेरे जीवन की धारा निर्बाध बहती है।
- मुनि क्षमासागर