।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। सादर जय जिनेन्द्र! 'आई सपोर्ट जैनिज़्म' पर समस्त सामग्री विशुद्ध जिनधर्म प्रभावना के उद्देश्य से समर्पित है। जिनवाणी का सम्मान सर्वोपरि है; कृपया इसे पूर्ण विनय एवं सात्विक भाव से अवलोकन करें।
।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं बड़े बाबा अर्हं नमः ।।

जरा सोचिये ?

पहले दरवाजे के बाहर लिखा जाता था
अतिथि देवों भव
फिर लिखा जाने लगा
शुभ लाभ
अब लिखा जाता हैं
कुत्तों से सावधान
जरा सोचिये ?
हम किस तरफ बढ़ रहे हैं !