वाराणसी: इस नगर में भदैनीघाट सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का जन्म स्थान है। भेलुपुर में तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की जन्मभूमि है। शहर में अन्य कई मंदिर दर्शनीय हैं।
सिंहपुरी: बनारस से 7 मील। यहाँ श्रेयांसनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप से तीन कल्याणक हुए।
चंद्रपुरी: बनारस से 13 मील अथवा सारनाथ से 7 मील पर गंगा किनारे। यहाँ पर चंद्रप्रभु भगवान का जन्म हुआ था।
प्रयाग: यहाँ त्रिवेणी संगम के पास एक पुराना किला है। किले के भीतर जमीन के अंदर एक अक्षय वट (बड़ का पेड़) है। कहते हैं कि श्री ऋषभदेव ने यहाँ तप किया था।
अयोध्या: आदिनाथ, अजितनाथ, अभिनन्दननाथ, सुमतिनाथ, अनन्तनाथ का जन्म स्थान।
रत्नपुरी: फैजाबाद जिले में सोहावल स्टेशन से डेढ़ मील। धर्मनाथ स्वामी के चार कल्याणक हुए हैं।
श्रावस्ती: बहराइच से 29 मील। यह भगवान संभवनाथ की पवित्र जन्मभूमि है और यहीं 4 कल्याणक हुए हैं।
कौशाम्बी: प्रयाग से 32 मील पर फफौसा ग्राम के पास। यहाँ पर पद्मप्रभु स्वामी के चार कल्याणक हुए हैं।
कम्पिला: कानपुर कासगंज लाइन पर। कायमगंज स्टेशन से 8 मील। यहाँ विमलनाथ स्वामी के चार कल्याणक हुए हैं।
अहिक्षेत्र: बरेली-अलीगढ़ लाइन पर आमला स्टेशन से 8 मील रामनगर गाँव से लगा हुआ यह क्षेत्र है। इस क्षेत्र पर तपस्या करते हुए भगवान पार्श्वनाथ के ऊपर कमठ के जीव ने घोर उपसर्ग किया था और उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
हस्तिनापुर: मेरठ से 22 मील। शांतिनाथ, कुन्थुनाथ और अरहनाथ तीर्थंकरों के गर्भ, जन्म और तप कल्याणक हुए हैं।
चौरासी: मथुरा शहर से डेढ़ मील। यहाँ से जम्बूस्वामी मोक्ष गए हैं।
शौरीपुर: शिकोहाबाद से 10 मील वटेश्वर ग्राम है। यहाँ पर नेमिनाथ स्वामी के गर्भ और जन्म कल्याणक हुए हैं।
देवगढ़: ललितपुर के निकट (जाखलौन स्टेशन से 8 मिल दूरी पर) है। भगवान शांतिनाथ की 12 फुट उत्तुंग विशाल प्रतिमा, 8 मानस्तम्भ हैं तथा कई कलापूर्ण सुंदर प्राचीन मंदिर हैं।
अहार: ललितपुर स्टेशन से 36 मील टीकमगढ़ है, वहाँ से 12 मील पूर्व में यह क्षेत्र स्थित है। यहाँ पर 18 फुट उत्तुंग भगवान शांतिनाथ की सर्वोत्तम प्रतिमा तथा विशाल संग्रहालय है।