।। ॐ नमः सिद्धेभ्यः ।। सादर जय जिनेन्द्र! 'आई सपोर्ट जैनिज़्म' पर समस्त सामग्री विशुद्ध जिनधर्म प्रभावना के उद्देश्य से समर्पित है। जिनवाणी का सम्मान सर्वोपरि है; कृपया इसे पूर्ण विनय एवं सात्विक भाव से अवलोकन करें।
।। ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं बड़े बाबा अर्हं नमः ।।

आदमी

आदमी को खल रहा हैं आदमी,
मरुस्थल सा जल रहा हैं आदमी !
दूसरे का कौर मुँह से छीनकर,
आजकल में पल रहा हैं आदमी !!
आदमी की शक्ल से अब डर रहा हैं आदमी,
आदमी हे मरता हैं मर रहा हैं आदमी !
आदमी को लूट कर घर भर रहा हैं आदमी,
समझ कुछ आता नहीं क्या कर रहा हैं आदमी !!