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Showing posts from November, 2016

एक मंदिर के दरवाज़े

बहुत सुन्दर शब्द जो एक मंदिर के दरवाज़े पर लिखे थे।  ❝सेवा करनी है तो - घड़ी मत देखो❞ ❝प्रसाद लेना है तो - स्वाद मत देखो❞ ❝सत्संग सुनाना है तो - जगह मत देखो❞ ❝बिनती करनी है तो - स्वार्थ मत देखो❞ ❝समर्पण करना है तो - खर्चा मत देखो❞ ❝रहमत देखनी है तो - जरूरत मत देखो❞ ❝जीत❞ किसके लिए, ❝हार❞ किसके लिए, ❝ज़िंदगी भर❞ ये ❝तकरार❞ किसके लिए,  जो भी ❝आया है वो ❝जायेगा❞ एक दिन यहाँ से, फिर ये ❝इंसान❞ को इतना ❝अहंकार❞ किसके लिए। 
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