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Showing posts from July, 2015

वर्तमान स्थान - आचार्यश्री

विश्व वंदनीय आचार्यश्री 108 विद्यासागरजी महाराज ससंघ इस समय बीना बारहा (म.प्र.) में विराजमान हैं।  इस अवसर पर आप सभी सादर आमंत्रित हैं।    बाल ब्रह्मचारी संघ नायक आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ प्रतिदिन के कार्यक्रम समय ……………………………………. कार्यक्रम   प्रात: 6 बजे ……………………………. आचार्य भक्ति   प्रात: 7 से 8:30 बजे …………………… स्वाध्याय   प्रात: 9:00 बजे………………………….. गुरु पूजन   प्रात: 9:30 बजे………………………….. आहार चर्या   प्रात: 11:30 बजे…………………………. इर्यापथ भक्ति   सन्ध्या 5:45 बजे……………………….. आचार्य वन्दना   सन्ध्या 7:00 बजे……………………….. सामायिक विशेष: हर रविवार को दोपहर 4 बजे से तपोमूर्ति आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के प्रवचन होते हैं।  क्षेत्र पर भोजन तथा आवास की सुविधा उपलब्ध है।  *२१/०७/२०१५

अनमोल वचन

जिंदगी मैं ये तीन चीजें हमेशा संजो कर रखना, जरुरत पर बहुत काम आएंगी।  १. ज्ञान जहाँ मिले वहां से उठा लो।  २. भरोसा हर किसी का जीतते रहो आगे फायदा होगा।  ३. दोस्त बनाते रखो क्योंकि कोई ये नहीं जनता के किस समय किस कंधे की जरुरत पद जाये।

इसी को जिंदगी कहते हैं

चलने वाले पैरो में कितना फर्क है एक आगे तो एक पीछे पर न तो आगे वाले को अभिमान है और न पीछे वाले को अपमान क्योंकि उन्हें पता होता है कि पलभर में ये बदलने वाला होता है। इसी को जिंदगी कहते हैं। 

जैनत्व की प्रमुख पहचान

जय जिनेन्द्र कहना जैनत्व की प्रमुख पहचान है। हम पुरे दिन में शायद भगवान का स्मरण करने के लिए समय न निकाल पाए, लेकिन जय जिनेन्द्र कहने से हम स्वतः जिनेन्द्र परमात्मा को नमस्कार करते है। वो भी सिर्फ एक या दो तीर्थकर को नहीं, बल्कि भूत, भविष्य व वर्तमान के सभी तीर्थकर को नमस्कार करने का लाभ मिलता हैं।

रसोई घर

रसोई घर को चौका कहा जाता है क्योंकि। जहाँ चार बातों का विचार किया जाता है वह है चौका। चार बातें हैं 1. कब, 2. कितना, 3. कैसे, और 4. क्या ? मतलब कब खाना ? कितना खाना ? कैसे खाना ? और क्या खाना ? कल तक चौके को रसोईघर कहा जाता था, आज वह किचन हो गया है। रसोई घर और किचन में अन्तर है, जहाँ रस बरसे वह रसोई है तथा जहाँ किच-किच हो वह किचन है। भारतीय संस्कृति के हिसाब से अच्छे शब्द सोच समझ के दिए गए है उन्हें वही रहने दे।

णमोकार चालीसा

 सब सिंहो को नमन कर,                  सरस्वती को ध्याय |   चालीसा नवकार का,                 लिखूं त्रियोग लगाय ||   महामंत्र नवकार हमारा,            जन जन को प्राणों से प्यारा ||१||मंगलमय यह प्रथम कहा हैं,               मंत्र अनधि निधन महा हैं ||२||षटखंडागम में गुरुवर ने,          मंगलाचरण लिखा प्राकृत में ||३||यही से ही लिपिबद्ध हुआ हैं,             भविजन ने डर धार लिया हैं ||४||पांचो पद के पैतीस अक्षर,              अट्ठावन मात्राए हैं सुखकर ||५||मंत्र चौरासी लाख कहाए,          ...

ज़हर क्या है ?

किसी ने भगवान महावीर से पुछा "ज़हर क्या है"..? भगवान महावीर ने बहुत सुन्दर जबाब दिया "हर वो चीज़ जो ज़िन्दगी में आवश्यकता से अधिक होती है वही ज़हर है" (फ़िर चाहे वो ताक़त हो, धन हो, भूख हो, लालच हो, अभिमान हो, आलस हो, महत्वकाँक्षा हो, प्रेम हो या घृणा आवश्यकता से अधिक "ज़हर" ही है)

संत शिरोमणि

संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी एक संत जो वात्सल्य की प्रतिकृति है एक संत जो दीक्षा सम्राट है एक संत जो स्वर्ण मई तपस्वी है एक संत जो अनुपम शिल्पी है एक संत जो नूतन चिंतन के कृषि है एक संत जो जिनागम के पथिक है एक संत जो सबके आदर्शोत्तम है एक संत जो गुरु के उपासक है एक संत जो आसमान से अधिक विशाल है एक संत जो हिमालय से ऊँचे है एक संत जो सागर से गंभीर है ऐसे संत को जाने, माने, पहचाने क्योंकि यही इस युग के महावीर है। उनके चरणों में कोटि -कोटि नमन है।

संयम

संयम क्या चीज़ है..? ये पूछिये उस बच्चे से.. जो काम करता है 'रोटी' के लिये.. ? 'खिलौनों' की दुकान पर..।

समाधि भावना

दिन रात मेरे स्वामी, मैं भावना ये भाऊँ, देहांत के समय में, तुमको न भूल जाऊँ । टेक। शत्रु अगर कोई हो, संतुष्ट उनको कर दूँ, समता का भाव धर कर, सबसे क्षमा कराऊँ ।१। त्यागूँ आहार पानी, औषध विचार अवसर, टूटे नियम न कोई, दृढ़ता हृदय में लाऊँ ।२। जागें नहीं कषाएँ, नहीं वेदना सतावे, तुमसे ही लौ लगी हो,दुर्ध्यान को भगाऊँ ।३। आत्म स्वरूप अथवा, आराधना विचारूँ, अरहंत सिद्ध साधूँ, रटना यही लगाऊँ ।४। धरमात्मा निकट हों, चर्चा धरम सुनावें, वे सावधान रक्खें, गाफिल न होने पाऊँ ।५। जीने की हो न वाँछा, मरने की हो न ख्वाहिश, परिवार मित्र जन से, मैं मोह को हटाऊँ ।६। भोगे जो भोग पहिले, उनका न होवे सुमिरन, मैं राज्य संपदा या, पद इंद्र का न चाहूँ ।७। रत्नत्रय का पालन, हो अंत में समाधि, ‘शिवराम’ प्रार्थना यह, जीवन सफल बनाऊँ ।८।
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