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Showing posts from July, 2018

खजुराहो क्षेत्र के विकास में अपना योगदान दें: आचार्यश्री

साभार: भास्कर

धर्म के साथ चिकित्सा सेवा की शुरुआत खजुराहो में

।।कृपया अधिक से अधिक शेयर करे धन्यवाद।। साभार: पीयूष जैन सुरखी 

पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह 2018

पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह का क्रम प्रारम्भ। कुछ स्थानों की हुई तिथि घोषित, अधिकांश स्थानों की घोषणाओं का इंतज़ार बाक़ी। ↬  परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ, अतिशय क्षेत्र खजुराहो जिला छतरपुर मप्र- 29 जुलाई, रविवार दोपहर 1:30 बजे से ।  ↬  पूज्य मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ससंघ का पावन वर्षायोग 2018, आंवाजी राजस्थान - 26 जुलाई, गुरूवार दोपहर 1:30 बजे से।   ↬  पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ, रतलाम मप्र- 29 जुलाई, रविवार, दोपहर 1:30 बजे से। ↬  पूज्य मुनिश्री सुख सागर जी महाराज, स्थान-हीरे अंग्रोली, तहसील- खानापुर, जिला- बेलगाम, कर्नाटक- 29 जुलाई। ↬  पूज्य मुनि श्री 108 विमल सागर जी महाराज ससंघ, गौरझामर जिला सागर (म.प्र) - 26 जुलाई, गुरूवार दोपहर 1:30 बजे से।  ↬  वन्दनीय आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ससंघ, झाँसी उप्र- 29 जुलाई, रविवार, प्रातः 8:30 बजे। निरंतर अपडेट होने वाला पहला जैन ब्लॉग संपूर्ण पावन वर्षायोग कलश स्थापना समारोह 2018 की जानकारियों के लिए निरंतर पढ़ते र...

आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज (ससंघ) इस समय अतिशय क्षेत्र खजुराहो जी में विराजमान हैं।

विश्व वंदनीय आचार्यश्री १०८ विद्यासागरजी महामुनिराज (ससंघ) इस समय अतिशय क्षेत्र खजुराहो जी में विराजमान हैं। इस अवसर पर आप सभी सादर आमंत्रित है ।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें - श्री विनोद जैन : +91-9425342180, श्री दिलीप जैन : +91-9893717820, श्री शांत जैन : +91-9425146054, श्री अनूप जैन : +91-9425143679, श्री राकेश जैन : +91-9165816035, श्री योगेश जैन : +91-9584284298 निकटतम रेल्वे स्टेशन : खजुराहो (KURJ) निकटतम बस स्टैंड : खजुराहो बस स्टैंड निकटतम हवाई अड्डा : खजुराहो हवाई अड्डा निकटतम स्थान : छतरपुर लगभग ४० किलो मीटर भोपाल से खजुराहो के लिए ट्रेन 22163 - BHOPAL - KHAJURAHO

गलत-जानकारी की समस्या को दूर करने के लिए, WhatsApp ने की गाइडलाइन जारी

सभी प्राणियों में अद्धभुत आनन्द की अनुभूति।

अहोभाग्य छतरपुर जिले में, पंचमकाल में तीर्थंकर सम समवशरण आ रहा है। प्रथमानुयोग के शास्त्रों में पड़ते हैं कि जहां से तीर्थंकर का समवशरण विहार करता था उसके चारों ओर आनंद की बहार आ जाती थी। आज भी जब वर्तमान में समवशरण के रूप में आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज का विहार जिस ऒर होता है उसके चारों ऒर सभी प्राणियों में एक अद्भुत आनन्द की अनभूति होती है। आज समूचा छतरपुर जिला आनन्द की अनभूति कर रहा है। आओ सब मिलकर ऐसी अगवानी करें जो भूतो न भविष्यति। रचना:भागचन्द जैन पीलीदुकांन बयड़ामलहरा।

भूमि से प्राप्त हुई थी 9 वी शताब्दी

जबलपुर।   त्रिपुर सुन्दरी मंदिर  से प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान की प्रतिमा कुछ दिनो पूर्व भूमि से प्राप्त हुई थी 9 वी शताब्दी की यह प्रतिमा अभी त्रिपुर सुन्दरी मंदिर में रखी है जिसपर प्रशासन ने कब्जा कर रखा है, जबलपुर के आसपास 1 लाख से अधिक की जैन समाज है पर अभी तक प्रतिमा प्राप्ति के लिए समाज प्रशासन पर किसी तरह का दबाव नहीं बना रही यह आश्चर्यजनक है।  कुछ समय पूर्व ही खण्डेला, सीकर के पास मिली मूर्ति जब प्रशासन ने अपने कब्जे में ली तब समाज की जागृति व विश्व जैन संगठन द्वारा किए प्रयास की वजह से प्रतिमा समाज को देने के लिए प्रशासन तैयार हुआ, अगर जबलपुर की जैन समाज प्रयास न करेगी तो 2-3 दिन में जब मूर्ति संग्रहालय में चली जाएगी तब उसके मिलने की जो संभावना है वह भी खत्म हो जाएगी समाज को प्रतिमा प्राप्ति के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करना चाहिए अन्यथा यह विशाल व मनमोहक जिनबिम्ब सदा के लिए संग्रहालय में कैद हो जाएंगे। हमारे पूर्वजो ने विशाल जिनालय बनवाएं और उनमें प्रतिमाएँ स्थापित करवाई लेकिन हमारी उदासीनता के चलते आज हमारी विरासत दूसरे लोगो के पास जा रही है, समाज को त्व...

शान्तिसागर जी महामुनिराज

आचार्य श्री जी का हुआ मंगल विहार

परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार आज दोपहर बाद अतिशय क्षेत्र श्री बंधा जी से हुआ। संभावित दिशा- बम्होरी, जतारा, छतरपुर

सबसे ज्यादा दीक्षाएं प्रदान करने के लिए

गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स ने प्रदान किया सर्टिफिकेट ऑफ़ एक्सीलेंस मोस्ट जैन मनेस्टसिज़म बिस्टोड बाय अ मुनि साभार: सौरभ मोदी, सागर 

विद्योदय

महापुरुष प्रकाश में नहीं आते, आना भी नहीं चाहते प्रकाश प्रदान में ही उन्हें रस आता हैं उनका कथन किसी श्लोक से कम नहीं उनका लेखन किसी दर्शन से कम नहीं और उनका जीवन किसी शास्त्र से कम नहीं उनका हाथ ही पवित्र पात्र हैं पृथ्वी ही जिनकी सैय्या हैं जिन्हें अप्राप्त की चाह नहीं और प्राप्त का मोह नहीं जो दिगम्बर हैं रोम-रोम में पुरुषार्थ वो परोपकार का सागर लिये अनंत यात्री महापुरुष आचार्य श्री विद्यासागर जी  आनंदमयो ज्ञानमयो विज्ञानमयो आदित्या आचार्य श्री की उपस्थिति ही विद्या का उदय हैं विद्योदय हैं ! स्त्रोत : विद्योदय  

मेरी नज़र से विद्योदय

रुआबाँधा। अन्य नगरों की तरह हमारे रुआबाँधा भिलाई को भी फ़िल्म विद्योदय देखने का पुण्यशाली अवसर मिला। विद्योदय देखने से पहले से मन मे एक छवि थी कि फ़िल्म में कई पात्र अभिनय करेंगे। लेकिन जब फ़िल्म आरम्भ हुई तो लगा इस फ़िल्म में अभिनय तो है ही नही जो है वह तो जीवन्त सा वास्तविकता के निकट है सूत्रधार बड़ी कुशलता से चित्रों, दृश्यों, भावों से उन अविस्मरणीय पलो को जीवंत कर देता बाल ब्रम्हचारिणी सुवर्णा दीदी, महावीर जी सदलगा एवम विद्याधर के बालसखा मित्र जब विद्याधर की कही अनकही उन बातों को बड़ी आत्मीयता से सुनाते तब लगता हम सदलगा में ही बैठे साक्षात दृश्य देख रहे हो। सदलगा के अष्टगे परिवार के निवास में रखा पालना देख लगता था वर्तमान के सभी जीवों के पालनहार शिशु बालक विद्याधर कुछ ही समय पहले पालने से उठे हो फ़िल्म में रेत कलाकार की सरपट उंगलियों का स्पर्श मनोभावों को दर्पण सा उकेर देता। अजमेर के भागचंद जी सोनी के परिवार की माँ जब मुनिश्री विद्यासागर के प्रथम आहार की घटना सुनाती है तब लगता 50 वर्ष पूर्व का वह पल सामने ही हो। जब जब आचार्यश्री चित्रपटल पर आते लगता हम सभी साक्षात जीवन्त उनके...
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