अध्यात्म सरोवर के राजहंस, संत श्रेष्ठ 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी का जन्म भारत के दक्षिणांचल में कर्नाटक प्रांत अंतर्गत बेलगांव जिले के सहलगा समीपस्थ चिक्कौड़ी ग्राम में 10 अक्टूबर 1946 शरद पूर्णिमा को हुआ। आपकी माता का नाम श्रीमंती एवं पिता का नाम श्री मल्लप्पा जी अष्टगे थे। अपनी धार्मिक वृत्ति के कारण आपके माता-पिता ने अपनी संतों के नाम (मात्र आपको छोड़कर) तीर्थंकरों के नाम पर रखे महावीर, अनंतनाथ, शांतिनाथ। शांत एवं प्रशम मुख मुद्रा से ज्येष्ठा पुत्री ने शांता, तो सुनहली देह के कारण कनिष्ठा पुत्री ने सुवर्णा नाम पाया। आप अपने माता-पिता की द्वितीय संतान है। द्वितीय होते हुए भी आप अद्वितीय हैं। आपके नामकरण के पीछे एक घटना है। सदलगा के निकट अक्किवाट ग्राम है। वहाँ भट्टारक मुनि श्री विद्यासागर जी की समाधि स्थली है। आपके माता-पिता प्रायः वहाँ दर्शनार्थ जाया करते थे। अतः उन्हीं के नाम पर आपके माता-पिता ने आपका नाम विद्यासागर रखा। जब आप गर्भ में थे, तब आपकी माता ने मंगलकारी स्वप्न देखे-एक चक्र उनके कक्ष की ओर घूमता हुआ आ रहा है, फिर दो तीर्थंकर भगवान, उन्हीं के पीछे दो चार...