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Showing posts from June, 2018

सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में 71 फीट ऊंचे कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण

अजमेर!उल्लेखनीय है कि इस कीर्ति स्तंभ को तैयार करने में करीब 4 माह लगे। स्तंभ के आसपास पत्थर दीवारों पर विद्यासागर महाराज से जुड़ी सजीव कहानी व्यक्त करती प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। कीर्ति स्तंभ को लोकार्पण से पूर्व आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। लगभग 50 वर्ष पूर्व अजमेर की धरा पर महाकवि आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने ब्रह्मचारी विद्याधर को दिगंबरी दीक्षा प्रदान की थी, जो आज विश्व में आचार्य विद्यासागर महाराज के नाम से जाने जाते हैं।  महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रसादी वितरण आज विद्यासागर जी महाराज के 50वें संयम स्वर्ण जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में शनिवार को प्रसादी वितरण कार्यक्रम होगा। राजकुमार पाण्ड्या ने बताया कि अजमेर ओल्ड आयरन एंड मोटर पार्ट्स व्यापार संघ अजमेर एवं जैन व्यापारियों द्वारा प्रसादी वितरण शनिवार सुबह 11.15 बजे लाल कोठी आदिनाथ मार्ग केसरगंज में होगा।  बुराई तभी मिटती है, जब पिटती है। जब कोई शिष्य गुरू के प्रति समर्पण करता है तो वह मिटने पिटने के लिए तैयार हो जाता है। जिस पात्र में खट्टी-छाछ भरी रही, उसमें शुद्ध दूध रखोगे तो वह भी खराब हो जाएगा। सुधासागर मह...

संयम स्वर्ण महोत्सव

आचार्य भगवन ऐसे संत है जिनका जीवन एक सम्पूर्ण दर्शन है जिनके आचरण में जीवों के लिए करुणा पलती है जिनके विचारों में प्राणी मात्र का कल्याण आकर लेता है जिनकी देशना में जगत अपने सदविकास का मार्ग प्रशस्त करता है आप निरीह निस्पृह वीतरागी है फिर भी आपके विचार भारतीयता के प्रति अगाध निष्ठा राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता से ओतप्रोत है आपका चिंतन प्राचीन भारतीय हितचिंतको दार्शनिको एवं संतो का अनुकरण करते हुए भी मौलिक है आचार्य महाराज तो ज्ञानवारिधी है और उनके विचारों को संकलित करना छोटी सी अंजुली में सागर को भरने का असंभव प्रयास करना है। ।। नमोस्तु भगवन नमोस्तु ।। आईसपोर्टजैनिज़्म परिवार की ओर से आप सभी को संयम स्वर्ण महोत्सव की ढेरों शुभकामनाएं।

34 साल के बाद दिगौड़ा की धरती पर पड़े आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरण

जैन समाज में उमड़ा आस्था का सैलाब दिगौड़ा पपौराजी से विहार करते हुए आचार्य विद्यासागरजी महाराज शुक्रवार को सुबह दिगौड़ा पहुंचे, जहां जैन समाज के लोगों ने उनकी भव्य अगवानी की।  आचार्यश्री मुख्य बाजार होते हुए जैन मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने सभी समाज के लोगों को मानवता की सीख देते हुए प्रवचन दिए। स्थानीय निवासी अभय जैन ने बताया कि 34 साल पहले गुरुवर दिगौड़ा में आये थे। अब एक लंबे अरसे के बाद उन्होंने दिगौड़ा पर कृपा की और धन्य कर दिया। आचार्य ने महेंद्र कुमार जैन के घर पर भोजन ग्रहण किया। दिगौड़ा में बहुत दूर दूर से जैन समाज के लोगों ने पहुंचकर आचार्य के दर्शन किए।  शिक्षक सुखनंदन जैन ने बताया कि आचार्य टीकमगढ़ से बंधाजी के लिए विहार पर निकले थे, परंतु दिगौड़ा वालों का सौभाग्य है कि गुरुवर दिगौड़ा होते हुए निकले। ग्रामवासियों को दर्शन और सेवा का अवसर प्रदान किया।  समाज के लोगों में आस्था देखते ही बनती थी। हर कोई गुरुवर के दर्शनों को लालायित देखा जा रहा था। वो जिस गली से भी गुज़रे सभी आस्था से नतमस्तक हो गए। जैन समाज के अलावा सभी धर्मों के मानने वाले गुरुवर के दर्शन को दौड़...
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