मंदिर तो बहुत बन रहे हैं, और बनते रहेंगे, लेकिन हम अव सरस्वती मंदिर की ओर आगे बढ़ रहे है ! आचार्यश्री ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर प्रहार करते हुये कहा कि आजकल जो शिक्षण दिया जा रहा हैं, वह किसी काम का नहीं हैं , पढ़े लिखे होने के उपरांत भी वह अपने जीवन को उन्नत नहीं बना पाते! उपरोक्त उद्गार संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने रामटेक महाराष्ट्र में चातुर्मास कलश स्थापना के दौरान अपने आशीष वचन में कहे उन्होंने कहा कि वर्तमान में पढ़े-लिखे होकर के भी लाखों की संख्या में बेरोजगारी की ओर नौजवान बढ़ रहे हैं ! पढ़ लिखने के पश्चात भी प्रबंधन सही नहीं होने से श्रम का सही उपयोग नहीं कर पा रहे है! "पहले के लोग अपने बच्चों को दायित्व सिखाते थे, लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में दायित्व का अभाव हैं," आचार्य श्री ने कहा कि अच्छे संस्कारों के लिये अपने धन का सदुपयोग करना आपका कर्तव्य हैं, यदि व्यवस्थित कार्य करोगे तो आपके यहाँ दान दातारों की कमी नहीं है,जब तक कार्य पूरा नहीं होता तब तक भरोसा नहीं होता इसलिये जिन लोगों ने आज बोलियाँ ली हैं वह ११ माह में इस ओर ध्यान दें,उन्होंने कह...