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Showing posts from July, 2017

मंदिर तो बहुत बन रहे हैं : आचार्य श्री

मंदिर तो बहुत बन रहे हैं, और बनते रहेंगे, लेकिन हम अव सरस्वती मंदिर की ओर आगे बढ़ रहे है ! आचार्यश्री ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर प्रहार करते हुये कहा कि आजकल जो शिक्षण दिया जा रहा हैं, वह किसी काम का नहीं हैं , पढ़े लिखे होने के उपरांत भी वह अपने जीवन को उन्नत नहीं बना पाते! उपरोक्त उद्गार संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने रामटेक महाराष्ट्र में चातुर्मास कलश स्थापना के दौरान अपने आशीष वचन में कहे उन्होंने कहा कि वर्तमान में पढ़े-लिखे होकर के भी लाखों की संख्या में बेरोजगारी की ओर नौजवान बढ़ रहे हैं ! पढ़ लिखने के पश्चात भी प्रबंधन सही नहीं होने से श्रम का सही उपयोग नहीं कर पा रहे है! "पहले के लोग अपने बच्चों को दायित्व सिखाते थे, लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में दायित्व का अभाव हैं," आचार्य श्री ने कहा कि अच्छे संस्कारों के लिये अपने धन का सदुपयोग करना आपका कर्तव्य हैं, यदि व्यवस्थित कार्य करोगे तो आपके यहाँ दान दातारों की कमी नहीं है,जब तक कार्य पूरा नहीं होता तब तक भरोसा नहीं होता इसलिये जिन लोगों ने आज बोलियाँ ली हैं वह ११ माह में इस ओर ध्यान दें,उन्होंने कह...

हाइकू – मुनिश्री योगसागर महाराज जी

हाइकू जापानी छंद की कविता है इसमें पहली पंक्ति में 5 अक्षर, दूसरी पंक्ति में 7 अक्षर, तीसरी पंक्ति में 5 अक्षर है। यह संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाली है। मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने 400 से ज्यादा हाइको लिखे हैं। आपका जन्म: १३ सितम्बर १९५६ दिन: गुरूवार, को ग्राम सदलगा कर्नाटक में हुआ था। ब्रह्मचर्य व्रत: २ मई १९७५, क्षुल्लक दीक्षा: १८ दिसंबर १९७५, ऐलक दीक्षा: १८ अप्रैल १९७७, मुनि दीक्षा: १५ अप्रैल १९८० (सागर मध्यप्रदेश) आप आचार्य भगवन जी के गृहस्थ जीवन के छोटे भाई हैं।  1 – मृत्यु अमर, यहाँ कौन दिखेगा, अमर यहाँ। 2 – तू ना समझा, नश्वर के शरण, में अशरण। 3 – विकृत वस्तु, के परिणमन का, नाम संसार। 4 – तू है चिद्रूप, पर क्यों रूप बना, तेरा विद्रूप। 5 – रूप कुरूप, से परे अरूप है, तेरा स्वरुप। 6 – भग्न घट सी, काया निशदिन ही, मॉल झराये। 7 – योगों की क्रिया, जिसकी प्रतिक्रिया, कर्मास्रव है। 8 – बाहर नहीं, भीतर निहारना, निरास्रव है। 9 – अनगार की, ध्यान की चिनगारी, कर्म जलाये। 10 – कहीं निहाल, तो कहीं है बेहाल, जग का हाल। 11 – कारागार को, जिनालय ब...

श्री पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक दिवस

मोक्ष सप्तमी के दिन भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस मनाया जाएगा। दिगंबर एवं श्वेतांबर जैन मंदिरों में भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना, शांतिधारा कर निर्वाण लाडू चढ़ाने की प्रथा है। जैन धर्म के अनुसार जिसका मोक्ष हो जाता है उसका मनुष्य भव में जन्म लेना सार्थक हो जाता है। जब तक संसार है तब तक चिंता रहती है जहां मोक्ष का पूर्णरूपेण क्षय हो जाता है वहीं मोक्ष हो जाता है। हमें अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए मोहरूपी शत्रु का नाश करना पड़ता है। अत: हमें सभी का सम्मान करना चाहिए। सब बड़ों के प्रति विनय भाव रखना चाहिए, क्योंकि विनय ही मोक्ष का द्वार है। इसीलिए सभी को चैतन्य प्रभु से रिश्ता जोड़ना चाहिए, क्योंकि पुण्यात्मा जहां भी चरण रखते हैं वहां से दुख, अंधकार, कषाय, क्लेश स्वमेव ही प्रकाश व सुखों में परिवर्तित हो जाते हैं। प्रभु का स्पर्श तो हमें स्वर्ण ही नहीं पारस बना देता है। हम भी पार्श्व प्रभु की तरह अपने भवों को कम करके निर्वाण प्राप्ति की ओर बढ़ें। अत: भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याण पर शिखरजी क्षेत्र की पूजा व निर्वाण कांड का पाठ करने पश्चात...

दीक्षा दिवस २८/०७/२०१९

आज पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा दीक्षित 25 मुनिराजों व 8 आर्यिका माताओं का दीक्षा दिवस है,पूज्य आचार्य श्री ने बड़े बाबा की छाँव में सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर जी में पूज्य ज्ञानसागर महाराज के परम आशीर्वाद से संघ को गुरुकुल बनाने के निमित्त 7 अगस्त  1989,श्रावण शुक्ला षष्ठी के दिन अपने वरद् हस्तों से द्वितीय बार 8 मेधावी बाल ब्रह्मचारिणी बहनों को आर्यिका दीक्षा प्रदान की जिनमें ज्येष्ठ आर्यिका प्रशांतमति माताजी आर्यिका पूर्णमति माताजी आर्यिका अनंतमति माताजी आदि प्रमुख है। पूज्य आचार्य श्री द्वारा दीक्षित सभी 8 आर्यिका माताएँ वर्तमान में विभिन्न स्थानों पर चातुर्मासरत है। पूज्य आचार्य देव ने 21 अगस्त 2004 श्रावण शुक्ला षष्ठी के दिन ही दयोदय तिलवारा घाट,जबलपुर में 25 उच्च शिक्षित बाल ब्रह्मचारी भाईयों को मुनि दीक्षा प्रदान की एवं शिवालय का मार्ग बताया आज उनमें से 19 मुनि भारत के विभिन्न प्रान्तों में चातुर्मासरत है। 14 वाँ दीक्षा दिवस ०१.मुनिश्री वीरसागर जी ०२.मुनिश्री क्षीरसागर जी ०३.मुनिश्री धीरसागर जी ०४.मुनिश्री उपशमसागर जी ०५.मुनिश्री प्रशमसागर जी ...

दशलक्षण (पर्युषण) पर्व परीक्षा न रखे जाने के लिए आवेदन पत्र

आप जैन है तो स्वाभाविक होगा आपका बच्चा किसी अच्छे स्कूल में पड़ रहा होगा । एक समय था जब गुरुकुल पद्दति से रहते हुए बालक पढ़ाई करता था जहां शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी विशेष महत्वपूर्ण थे समय परिवर्तन हुआ गुरुकुल कम होकर विद्या के मंदिर जैसे संस्थान खुल गए जहां शिक्षा पँर अधिक लेकिन संस्कारो पर भी ध्यान दिया जाता था जैसे महावीर बाल विद्या मंदिर, सरस्वती शिशु मंदिर आदि आदि। समय परिवर्तन के साथ साथ शिक्षा पद्दति में आये बदलाव ने तो जैसे संस्कारो की नींव ही हिला कर रख दी है।            वर्तमान में चल रही शिक्षा पद्दति में हमे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिये दी जाने वाली शिक्षा पर तो ध्यान दिया जाता है मगर अति व्यस्तता की बात कह कर संस्कारो से समझौता कर लिया जाता है इसलिये आज के समय मे बच्चे धर्म को नजदीक से नही जान पा रहे है और धर्म से मिलने वाले संस्कारो से विमुख होते जा रहे है यह बात परिवारों के साथ साथ समाज के लिये भी चिंतनीय है।             पूज्य मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ने अत्यंत करुणा भाव से समाज के गिरते हुए...

आचार्य श्री से दीक्षित मुनिराजो सूची तिथि के अनुसार

प.पू आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित:- 117 मुनिराजो के नाम की सूची क्रमशः देखे :- दीक्षा तिथि - 08/03/1980-द्रोणगिरी 1-मुनिश्री समयसागर जी दीक्षा तिथि - 15/04/1980-मोराजी सागर 2-मुनिश्री योगसागर जी 3-मुनिश्री नियमसागर जी दीक्षा तिथि- 29/10/1981-नैनागिर जी 4-मुनिश्री चेतनसागर जी 5-मुनिश्री ओमसागर जी दीक्षा तिथि - 20/08/1982-नैनागिर जी 6-मुनिश्री क्षमासागर जी 7-मुनिश्री गुप्तिसागर जी 8-मुनिश्री संयमसागर जी* दीक्षा तिथि - 25/09/1983-इशरी पारसनाथ 9-मुनिश्री सुधासागर जी 10-मुनिश्री समतासागर जी 11-मुनिश्री स्वभावसागर जी 12-मुनिश्री समाधिसागर जी 13-मुनिश्री सरलसागर जी दीक्षा तिथि - 01/07/1985-अहार जी 14-मुनिश्री वैराग्यसागर जी* दीक्षा तिथि - 31/03/1988-सोनागिर जी 15-मुनिश्री प्रमाणसागर जी 16-मुनिश्री आर्जवसागर जी 17-मुनिश्री मार्दवसागर जी 18-मुनिश्री पवित्रसागर जी 19-मुनिश्री उत्तमसागर जी 20-मुनिश्री चिन्मयसागर जी 21-मुनिश्री पावनसागर जी 22-मुनिश्री सुखसागर जी दीक्षा तिथि - 16/10/1997-नेमावर जी 23-मुनिश्री अपूर्वसागर जी* 24-मुन...

चौबीस तीर्थंकरों के बिना कुछ ना मिले

शासन मिले ना ऋषभनाथ के बिना । विनय मिले ना अजितनाथ के बिना । संभव हो ना संभवनाथ के बिना । वन्दन मिले ना अभिनन्दन के बिना । समृद्धि मिले ना सुमतिनाथ के बिना । पदवी मिले ना पद्मनाथ के बिना । दया मिले ना सुपार्श्वनाथ के बिना । उजाला मिले ना चन्द्रप्रभ के बिना । सुविधि मिले ना सुविधिनाथ के बिना । ठंडक मिले ना शीतलनाथ के बिना । यश मिले ना श्रेयांसनाथ के बिना । पूजनीय बने ना वासुपूज्य के बिना । निर्मल बने ना विमलनाथ के बिना । शक्ति मिले ना अनंतनाथ के बिना । धर्म होवे ना धर्मनाथ के बिना । शांति मिले ना शान्तिनाथ के बिना । करुणा मिले ना कुंथुनाथ के बिना । आश्रय मिले ना अरनाथ के बिना । ममता मिले ना मल्लिनाथ के बिना । मुक्ति मिले ना मुनिसुव्रत के बिना । नरक मिटे ना नमिनाथ के बिना। आनंद मिले ना अरिष्टनेमि के बिना । कमठ हारे ना पारसनाथ के बिना । चन्दना तिरे ना महावीर के बिना । साभार: बहन रेखा जैन अगर आपके पास भी धर्म से जुड़ी जानकारियां हैं, तो हमसे जरूर साँझा करे ! अपना पूरा नाम/ मोबाइल नंबर जरूर लिखे ! किसी भी प्रकार की जानकारियाँ / शिकायत एवं सुझाव के लिए ईमेल करे ! 📧: infoisja...

देवलोक से धरती पर आया मंदिर

इंदौर। मंदिर में स्थापित मूिर्तयों के चमत्कारों की गाथाएं तो आपने कई बार सुनी होगी लेकिन क्या आप मध्यप्रदेश के इस प्राचीन मंदिर की दिव्यता के बारे में जानते हैं? 1000 से ज्यादा वर्ष पुराने इस मंदिर की विशेषता है कि इस मंदिर को कभी किसी ने बनवाया नहीं, बल्कि ये देवलोक से उड़कर यहां पहुंचा है। वैज्ञानिक भी आज तक इस बात का राज नहीं तलाश सके हैं कि बिना नींव के भारी दीवारों वाला यह मंदिर यहां कैसे स्थापित हुआ।  मध्यप्रदेश के इंदौर शहर की देपालपुर तहसील के बनेडिय़ा गांव में स्थित श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र बनेडिय़ा जी, जैनियों के प्रमुख तीर्थस्थल में शामिल है। इस मंदिर से जुड़ी प्राचीन कथा इसे बेहद चमत्कारी बनाती है। कहा जाता है कि ये मंदिर यहां प्रकट हुआ है इसे बनवाया नहीं गया। इस बात की सच्चाई जानने के लिए मंदिर की खुदाई करवाई गई तो लोग चौंक गए। खुदाई में कहीं भी पक्की नींव का पता नहीं चला। बिना किसी ठोस नींव के यहां स्थापित इस अष्टकोणी भव्य मंदिर में एक भी खंभा नहीं है और मंदिर की दीवारें 6 से 8 फीट चौड़ी है । चौथे काल की प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं मंदिर के निकट रहने वा...

चलो रामटेक जी चलो

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी के सानिध्य में 5 दिवसीय कार्यक्रम 26 जुलाई 2017 बुधवार 24 मुनि दीक्षा दिवस, 27 जुलाई 2017 गुरुवार नेमिनाथ जयंती, 28 जुलाई 2017 शुक्रवार 25 मुनि दीक्षा दिवस, 29 जुलाई 2017 शनिवार मुकुट सप्तमी भगवान पार्श्वनाथ निर्वाण दिवस, 30 जुलाई रविवारी प्रवचन रामटेक अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री जी के ससंघ सानिध्य में पांच दिवसीय कार्यक्रम मनाया जाएगा आप सभी आमंत्रित है। निवेदक रामटेक कमेटी, प्रतिभा स्थल कमेटी रामटेक, आप सभी इस अवसर पर अवश्य आएं। रामटेक नागपुर से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर है। अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें। श्री जिनेन्द्र जैन लालाजी (रामटेक क्षेत्र अध्यक्ष) : +91-9225211744 सतेंद्र जैन [मामू] (रामटेक क्षेत्र मंत्री) : +91-9423224727 श्री पवन बड़कुर (रामटेक क्षेत्र उपमंत्री) : +91-9420247921 श्री सनत जैन [ट्रांसपोर्ट] (आवास व्यवस्था) : +91-9373582422 अगर आपके पास भी धर्म से जुड़ी जानकारियां हैं। तो हमसे जरूर साँझा करे। अपना पूरा नाम/ मोबाइल नंबर जरूर लिखे । किसी भी प्रकार की जानकारियाँ / शिकायत एवं...

संघी जी मंदिर का इतिहास

राजस्थान के प्राचीन नगरों में सांगानेर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है । सांगानेर की बसावट समतल भूमि पर है । जिसके तट पर सरस्वती नदी बहती थी । सांगानेर राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर से 13 किलोमीटर दूर दक्षिण की ओर स्थित है । प्राचीन ग्रंथों में इसका नाम संग्रामपुर भी मिलता है । यह नाम चतुर्थकालीन राजाओं से जुड़ा हुआ है । सांगानेर के पास चम्पावती , चाकसू , तथकगढ एवं आम्रगढ़ के राज्य थे , जिन्हें सांगानेर की समृद्धि , वैभव एवं उन्नति होने से ईर्ष्या थी । इन राजाओं ने मिलकर स्वर्गपुरी की उपमा को प्राप्त इस नगर को तहस नहस कर दिया । इन आतातायी राजाओं के सैनिक इस आदिनाथ मंदिर को भी तहस नहस करने के लिए आगे बड़े लेकिन वे मंदिर की सीमा में प्रवेश भी नही कर सके , मानो उन्हें मंदिर के रक्षक देव ने कीलित कर दिया हो । आतातायी राजाओं ने अपनी भाव परिवर्तित करके आदिनाथ बाबा के दर्शन का भाव प्रकट किया तथा मंदिर में प्रवेश कर आदिनाथ बाबा को माथा टेका तथा क्षमा याचना करके संकल्प लिया कि इस मंदिर का सरंक्षण करेंगे तथा बचे हुए जैन श्रावकों को उन राजाओं ने अभयदान भी दिया । आमेर राज्य के सीमा क्षेत्र ...

णमोकार मंत्र का क्या प्रभाव है ?

प्रश्न : णमोकार मंत्र के पर्यायवाची नाम बताईये ? उत्तर - अनादिनिधन मंत्र - यह मंत्र शाश्वत है, न इसका आदि है और न ही अंत है।  अपराजित मंत्र - यह मंत्र किसी से पराजित नहीं हो सकता है । महामंत्र - सभी मंत्रों में महान् अर्थात् श्रेष्ठ है ।  मूलमंत्र - सभी मंत्रों का मूल मंत्र अर्थात् जड़ है, जड़ के बिना वृक्ष नहीं रहता है, इसी प्रकार इस मंत्र के अभाव में कोई भी मंत्र टिक नहीं सकता है ।  मृत्युंजयी मंत्र - इस मंत्र से मृत्यु को जीत सकते हैं अर्थात् इस मंत्र के ध्यान से मोक्ष को भी प्राप्त कर सकते हैं ।  सर्वसिद्धिदायक मंत्र - इस मंत्र के जपने से सभी ऋद्धि सिद्धि प्राप्त हो जाती है ।  तरणतारण मंत्र - इस मंत्र से स्वयं भी तर जाते हैं और दूसरे भी तर जाते हैं ।  आदि मंत्र - सर्व मंत्रों का आदि अर्थात् प्रारम्भ का मंत्र है ।  पंच नमस्कार मंत्र - इसमें पाँचों परमेष्ठियों को नमस्कार किया जाता है ।  मंगल मंत्र - यह मंत्र सभी मंगलों में प्रथम मंगल है ।  केवलज्ञान मंत्र - इस मंत्र के माध्यम से केवलज्ञान भी प्राप्त कर सकते हैं ...

अभिषेक कैसे करें?

सभी मूर्तियों का अभिषेक करने की परंपरा गलत है। साथ ही प्रतिमा की गादी (जहां भगवान विराजमान रहते हैं, उसे गादी कहते हैं) वहां अभिषेक करना गलत है, मूर्खता है। पूज्यवर माघनंदी जी महाराज ने स्पष्ट उल्लेख किया है, कि किसी एक प्रतिमा को उठाकर पांडुकशिला पर विराजमान करके ही अभिषेक करना चाहिए। अब यदि बड़ी मूर्ति है, नही उठाई जा सकती तो, उसकी गादी को मंत्र के द्वारा पांडुकशिला बनाकर, फिर अभिषेक करना चाहिए। कई लोग अभिषेक करते हैं, जिसके कारण मूर्तियां काली पड़ जाती हैं। इससे उन्हें बहुत अशुभ कर्म का उदय होता है।अभिषेक के पहले जैसी मूर्ति चमक रही है, वैसी ही बाद में भी चमकना चाहिए। अगर अभिषेक करते हो, तो मार्जन भी अच्छी तरह से करना चाहिए। प्रतिमा जी पर श्रावक को कभी अपना माथा नहीं रखना चाहिए। अपनी मात्र 3 उंगलियों से भगवान के चरणों को स्पर्श करके अपने माथे पर लगाना चाहिए। एक बार अपने शरीर से स्पर्श करने के बाद पुनः प्रतिमा को नहीं छूना चाहिए। एक भगवान के चरणों में लगे हाथ, दूसरे भगवान को नहीं लगाना चाहिए । हाथ धोने के बाद ही, आप दूसरे भगवान को छू सकते हो। आप मूलनायक के चरण छू रहे हैं, और आपक...

जैन समाज चेते कही देर न हो जाये

"सम्मेदशिखरजी का भविष्य" जैन जगत के सभी श्रेष्ठीजनों से करबद्ध अपील:- 1-श्रावण मास में प्रतिदिन हजारों काॅवडिया पारसनाथ टोंक पर जल फूल पत्ती भांग धतूरा नारियल चढाने लगे हैं।  2-हमारे पुजारी उन्हें रोकने में असमथॅ हैं कई कारणों से।  3-पूवॅ मुख्यम॔त्री झारखंड पूरे पवॅत को आदिवासियों के गुरु का स्थान अधिकारपूवॅक घोषित कर चुके हैं व आदिवासियो को हक के लिए भडकाते हैं।  4-न्यायालय के निणॅय के अनुसार हम जैनों का (सभी जैनों का) स्वामित्व सिफॅ 24 टोकों की 0,86 एकड भूमि पर है शेष पूरा पवॅत वन विभाग का है।  क्या हम उस दिन की कल्पना करें जब हमें वंदना करने के लिए शासन अनुमति लेनी पडेगी या फिर आदिवासियों के विरोध के कारण सशस्त्र बलों की सुरक्षा में वंदना को बाध्य होना पडेगा। या फिर पारसनाथ भगवान की जय बोलने पर डंडे का प्रहार " गिरनारजी की तरह झेलना पडेगा ? या फिर केशरियाजी की तरह हिंसात्मक घटना का कडवा घूंट पीना पडेगा ? या फिर अंतरीक्ष पाश्वॅनाथ-सिरपुर की तरह सामाजिक द्वंद का अंतहीन दंश सहने को बाध्य होना पडेगा ? यदि अभी भी सम्पूर्ण जैन नहीं जागा तो कब जागेगा।...

रामटेक में एेतिहासिक चातुर्मास कलश स्थापना

नागपुर| रविवार का दिन रामटेक के धार्मिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। रविवार को राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यासागर महाराज व संघस्थ 37 मुनि की चातुर्मास कलश स्थापना 25 हजार से अधिक जैन व जैनेत्तर अनुयायियों की उपस्थिति में की गई। अपने प्रथम उद्बोधन में आचार्यश्री ने कहा कि मंदिर बहुत हैं, लेकिन संस्कार देने के लिए प्रतिभास्थली खोलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नागपुर जैन समाज ने रामटेक में प्रतिभास्थली खोलने का आशीर्वाद मांगा था। मेरी भी यही इच्छा थी कि महाराष्ट्र के रामटेक में ही प्रतिभास्थली का निर्माण हो। वर्तमान में 250 बहनें ब्रह्मचर्य व्रत लेकर प्रतिभास्थली में शिक्षा को मूर्त रूप दे रही हैं। खुशी की बात है ये बहनें छात्राओं को अन्य सांसारिक शिक्षा के साथ संस्कार भी दे रही हैं। प्रवचन के पूर्व दानदाताओं का चयन किया गया। प्रथम दानदाता का सौभाग्य राजस्थान से पधारे उद्योगपति अशोक पाटनी को प्राप्त हुआ। महेंद्र जैन रूपाली ने मोर पंख से निर्मित 50 वें संयम स्वर्ण महोत्सव का प्रतीक चिह्म अशोक पाटनी को भेंट किया। दानदाताओं ने आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। मंदिर...

मन की शांति के लिए छोड़ दिया 1 करोड़ का पैकेज

उपभोक्तावाद संस्कृति की चकाचौंध में जहां युवा लाखों और करोड़ों रुपये के पैकेज की ओर भाग रहे हैं। एशो-आराम और भौतिक वस्तुओं की चाह में रात-दिन एक किए हुए हैं। वहीं एक ऐसा भी युवा है, जिसने आत्म उत्थान और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए एक करोड़ रुपये के पैकेज को पलभर में त्याग दिया। यह शख्स है शैलेष जैन, जो अब दिगंबर मुद्रा धारण कर मुनि श्री वीर सागर महाराज बने। उन्होंने प.पू आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज से दीक्षा ग्रहण की। मुनि श्री वीर सागर यहां हांसी में दो दिगंबर जैन मुनियों के साथ ससंघ चातुर्मास कर रहे हैं।  वर्ष 2004 में वीर सागर महाराज बॉम्बे के स्टॉक एक्सचेंज में कन्सलटेंट फर्म में सर्विस पर थे। तब वह एक करोड़ रुपये के सालाना पैकेज पर कार्य कर रहे थे। वहीं उनके छोटे भाई निलेश जैन बॉम्बे में रिलायंस जियो के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट हैं। वर्ष 1994 में नागपुर से शैलेष ने केमिकल इंजीनियरिंग का कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए इन फाइनेंस और चार्टर्ड फाइनेंशियल अकाउंटेट (सीएफए) किया। इसके बाद वह बॉम्बे में एक कन्सलटेंट फर्म में सर्विस पर लगे। 31 वर्ष की आयु में उन्ह...

रामटेकजी: 50 वां कलश स्थापना का भव्य कार्यक्रम

रामटेक। अतिशय क्षेत्र रामटेक में होगा इस सदी के महान, अद्वितीय, मेरे परम सौभाग्य, परम उपकारी, कलिकाल के सर्वज्ञ, प्रमाणिक संत, आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का भव्य मंगलमय 50 वां कलश स्थापना का भव्य कार्यक्रम। गूँजेगी उठेगी सारी धरती गुरुवर के गीतों से और गायेगा सारा नभमंडल गुरुवर के 50 वें मंगल चातुर्मास का मंगल गीत झूम उठेगा सारा विश्व गुरुवर के भक्तिमय गीतों से होगा अतिशय क्षेत्र रामटेक की पावन पुनीत धरा पर इस युग के महान संत के दरबार मे महासंखनाद, और झूम जाएगा सारा विश्व भव्य मंगल कलश स्थापना 16 जुलाई 2017.  पावन सानिध्य- परम पूज्य आचार्य भगवंत विद्यासागर जी महाराज ससंघ 38 मुनिमहाराज। समय- दोपहर 2 बजे से। लाइव देखे- आईसपोर्टजैनिज़्म ब्लॉग पर दोपहर 2 बजे से। सुनो भाई खुशियां बनाओं रे, आई संयम स्वर्ण जयंती।

विदेश से 1 करोड़ का पैकेज छोड़ा, आज चला रहे हैं हथकरघा केंद्र:

न्यूयार्क सिटी से छोड़ी नौकरी लौटे देश, मध्य-प्रदेश  के अशोकनगर निवासी अमित जैन ने मैकेनिकल इंजीनियर आईआईटी दिल्ली से की। इसके बाद वह अमेरिका की न्यूयार्क सिटी में एक फाइनेंसियल कंपनी डिलॉइट में एक करोड़ से अधिक के पैकेज पर कार्यरत थे। इस दौरान वे आचार्यश्री के संदेश को याद करते रहे और बाद मे यह समझते हुए कि जिस देश की शिक्षा ली उसका ज्यादा से ज्यादा फायदा देश में ही समाज की भलाई हो सके, वापस आ गए। यहां आचार्यश्री के मार्गदर्शन में टीम बनी और हथकरघा उद्योग शुरू किया गया। उनके साथ दर्जन भर से अधिक ऐसे युवा हैं जो भी लाखों रुपये के पैकेज और पोस्ट छोड़कर इस कार्य में लगे गए हैं। इंडिया नहीं सिर्फ भारत गौ हत्या बंद करो, पशुधन बचाओ देश बचाओ हथकरघा के वस्त्र अपनाओ, स्वदेशी पहनो, स्वावलंबन लाओ जैनम् जयतु शासनम्, वंदे विधा सागरम् आचार्य भगवन एवं श्रीसंघ की समस्त जानकारियों  के लिये फेसबुक पेज से अवश्य जुडें। क्लिक करे 👉  आईसपोर्टजैनिज़्म साभार: श्री अमर जैन, गुना

आचार्य श्री द्वारा रचित: सूक्तियाँ

1. सावधान ज्ञान का नाम ही ध्यान है।  2. जो मानता स्वयं कोसबसे बड़ा है , वह धर्म से अभी बहुत दूर खड़ा है।  3. अर्थ की तुला से परमार्थ को मत तौलो।  4. अर्थ के पीछे अनर्थ मत करो।  5. उद्योग में हिंसा समझ में आती है, हिंसा का उद्योग समझ से परे है।  6. धन की प्राप्ति कदाचित पुण्य का फल हो सकता है, पर उसका सदुपयोग तपस्या का फल है।  7. जीवन का उपयोग करो, उपभोग नहीं। 8. अभिमान पतन का कारण है। 9. संसार से मोक्ष की ओर जाना है तो बस इतना करो कि जिधर मुख है, उधर पीठ कर लो और जिधर पीठ है उधर मुख कर लो। 10. गुरु की आज्ञा में चलना ही गुरु की सच्ची विनय हैं। 11. आवेग में विवेक मत खोओ। 12. बहुत नहीं बहुत बार पढ़ो। 13. पेट भरने की चिंता करो, पेटी भरने की नहीं। 14. अपने धन को द्रव्य बनाओ और उसे वहां पहुंचाओ जहां उसकी आवश्यकता है। 15. जिस व्यक्ति का हृदय दया से भीगा नहीं है, उस हृदय में धर्म का अंकुर नहीं फूट सकता। https://isupportjainism.blogspot.com 16. वासना का सम्बन्ध न तो तन से हैं और न वसन से है, अपितु माया से प्रभावित मन से है। ...

मेरे लिए हो गुरुवर

तुम जिंदगी से बढ़ कर, मेरे लिए हो गुरुवर, हर शब्द - शब्द मेरा, तेरे लिए हो गुरुवर, तुमको ही अपना माना, तुमको ही अपना जाना, गुरुदेव तुम्हे अपनी, आंखों में बसा लेंगे, तुम दूर रहो कितने, हम पास बुला लेंगे । त्रय बार नमोस्तु गुरुदेव सभी को सादर जय जिनेन्द्र https://isupportjainism.blogspot.com

विवाद रहित समाज हो तपोभूमि प्रणेता हाथ उठवा कर दिलाये पांच अनोखे संकल्प

मुम्बई। गोरेगाँव- अनोखी गुरु पूर्णिमा महोत्सव ने लिखा मुम्बई में एक नया इतिहास गुरु दक्षिणा पर लिया तपोभूमि प्रणेता ने भक्तो से अनोखा संकल्प परमाणु महाव्रत के रूप में पाँच संकल्प गुरु पूर्णिमा तो हर साल मनाई जाती है और मनाई जाती रहेगी पर इस वर्ष की गुरु पूर्णिमा जन्मों भक्तो को याद रहेगी क्योंकि इस वर्ष मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा पर आए अपने अपार भक्तो से पहली बार गुरु दक्षिणा के रूप ने पाँच अनोखे संकल्प दिलाये परमाणु व्रत संकल्प अभियान के अंतर्गत मुनि श्री ने उपस्थित अपार जन समूह को हाथ उठवा कर पाँच संकल्प दिलाये। 1. गाड़ी चलाते समय मोबाइल करने का त्याग। 2.घर बाहर सभी जगह पर थाली में झूठन छोड़ने का त्याग। 3.जिन होटलों ढाबों में वेज-नॉनवेज भोजन एक साथ मिलता है वहाँ खाने-पीने का त्याग । 4. टीवी देखते हुए एवं मोबाइल चलाते हुए भोजन करने का त्याग। 5.सबसे महत्वपूर्ण संकल्प: मुनि निन्दा करने व सुनने का त्याग एवं विवादरहित समाज बनाने का संकल्प के साथ विवाद में पड़ने व सामाजिक विवाद करने का त्याग करवाया। इन पाँच परमाणु व्रतों को पालन में गलती से नियम टू...

आचार्य श्री विद्यासागर जी का बचपन का घर

आचार्य श्री विद्यासागर जी का बचपन का घर जिसमे बाल्यकाल के समय उनको घर मे सभी इस नाम से बुलाते थे विद्याधर (पीलू, तोता) इसी घर मे उन्होंने अपना बचपन बिताया जिस साईकिल को वो चलाते थे आज भी उस घर मे वैसी ही रखी है जिन बर्तन में भोजन करते थे वो भी उस घर में आज तक सही सलामत रखे है जैसे किसी म्यूजियम में हर चीज पुरातत्व विभाग संभालकर रखता है वैसे ही आचार्यश्री के गृहस्त जीवन के भाई आज तक संभालकर रखे हुए है इस युग के भगवान स्वरूप आचार्य श्री से जुड़ी सभी चीजें देखकर मन प्रफुल्लित हो गया। साभार: आकांक्षा जैन, कलकत्ता अगर आपके पास भी धर्म से जुड़ी जानकारियां हैं, तो हमसे जरूर साँझा करे ! अपना पूरा नाम/ मोबाइल नंबर जरूर लिखे ! किसी भी प्रकार की जानकारियाँ / शिकायत एवं सुझाव के लिए ईमेल करे ! 📧:   infoisjainism@gmail.com

शरद पूर्णिमा चन्दा उतरा श्रीमती माँ के द्वारे

शरद पूर्णिमा चन्दा उतरा श्रीमती माँ के द्वारे पिता मल्ल्प्पा ऐसे हर्षे दुख भूल गये सारे सारे गगन में खुशियाँ छाई नर नारी मंगल गायें श्रीमती माँ का राजदुलारा सबको खूब सुहाए बोलो जय जय जय बोलो जय जय जय ज्ञान गुरु ने विद्याधर को विद्यासागर बना दिया नीर बूँद को सिन्धु बनाकर आगम का रस पिला दिया ज्ञान सूर्य के तेज़ प्रकाश में आत्म तत्व को जान लिया जिनवाणी की छाया में निश दिन आतम ध्यान किया उनके तप को देख़ सभी ने अपने शीश झुकाए श्रीमती माँ का राजदुलारा सबको खूब सुहाए बोलो जय जय जय बोलो जय जय जय चेहरे पर उनके, मुस्कान सदा ही रहती उनके दर्शन पाके मुरझाई कली खिल जाती तप की इतनी गर्मी, सर्दी न छू पाती मन है इतना शीतल, गर्मी पास न अाती अपने आशीष वचनों की माला हमें पहनाएं श्रीमती माँ का राजदुलारा सबको खूब सुहाए बोलो जय जय जय बोलो जय जय जय चहुँ दिशाओं का बाना ओढे रहते सदा दिगम्बर सीधे सरल विद्या गुरु है, न रखते कोई आडम्बर वीर झलकते है उनमें, जब करते आतम चिंतन दर्शन मूलाचार के, है समयसार के अद्भुत दर्शन विद्या गुरु सा एक सितारा नील गगन में छाए श्र...
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