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Showing posts from March, 2017

सराहनीय कदम

नेपाल जैन समाज का सराहनीय कदम, काश सभी जैन समाज ऐसा कदम उठाये ओर सब जैनों को एक साथ ले आये ! सभी अपना अपना पंथवाद छोड़ कर इस और सोचे तो काफी जैन मंदिर बच सकते है ! आएये आज आपको ले चलते है नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित जैन मंदिर में जो की दुनिया का ऐसा मंदिर है जहां नीचे की वेदी में दिगम्बर वेदी ऊपर श्वेतांवर वेदी हैं ! आपको जानकर हैरानी होगी पर यहाँ नेपाल काठमांडु में १ ही जैन मंदिर है ! जबकि 35 दिगम्बर जैन परिवार हे ओर श्वेतांवार 375 परिवार हे फिर भी वो लोग साथ में एक ही मंदिर में पूजा अर्चना करते है, जो की सराहनीय है ! नेपाल में एक ऐसी मूर्ति है जो 1700 साल पुरानी पार्श्र्व नाथ भगवान् की मूर्ति है ! मूलनायक आदिनाथ भगवान हे जो करीव 33 इंच की मूर्ति है विधि नायक भगवान श्री आदिनाथ जी हे जो 9 इंची के हे 15 इंची चोवीसी हे अतिशयकारी श्री पारसनाथ भगवान हे जो करीव 15 इंची हे कुल मिलाकर 4 मूर्ति है वेदी में ! साभार: ब्रह्मचारी सुनील भैया

मुनि श्री १०८ सुधा सागरजी महाराज

मुनि श्री १०८ सुधा सागरजी महाराज संक्षिप्त परिचय जन्म: सन १९५६ में मोक्ष सप्तमी जन्म नाम:  जय कुमार जैन जन्म स्थान: ईशुरवारा (सागर) माता का नाम: श्रीमती शांति देवी जैन पिता का नाम: श्री रूप चंद जैन क्षुल्लक दीक्षा: १० जनवरी १९८० क्षुल्लक दीक्षा स्थान: नैनागिरी क्षुल्लक दीक्षा नाम: परम सागर ऐलक दीक्षा: सन १९८२ ऐलक दीक्षा स्थान: सागर मध्य-प्रदेश  ऐलक दीक्षा गुरू: संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी मुनि दीक्षा: २५ सितम्बर १९८३ ,  आश्विन कृष्ण तीज मुनि दीक्षा स्थान: ईसरी मुनि दीक्षा गुरू: संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी विशेष: निरंतर ९ माह का मौन धारण किया ।

गुरुदेव के बालसखा

आचार्य श्री विद्या सागर जी महामुनिराज के बालसखा श्री मारुती जी विद्याधर से विद्यासागर पथ पर साथ रहने वाले बालसखा मारुती जी को जय जिनेन्द्र परिवार की ओर से शत् शत् नमन ! साभार :- अजय भैया सागर 

जीवन का पुण्य

धनवान बनने के लिए एक - एक कण का संग्रह करना पड़ता हैं, और गुणवान बनने के लिए एक - एक क्षण का सदुपयोग करना पड़ता हैं, इस जीवन का पैसा अगले जन्म में काम नहीं आता, मगर इस जीवन का पुण्य जन्म - जन्म तक काम आता हे !
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