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Showing posts from August, 2017

श्रावक संस्कार शिविर: उदयपुर (राज.)

मान्यवर, संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री 108 प्रमाणसागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108विराटसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में पर्यूषण महापर्व के पावन अवसर पर श्रावक संस्कार शिविर का भव्य आयोजन होने जा रहा है.आपसे विनम्र आग्रह है कि मुनि श्री के सानिध्य में इस शिविर के मणिकांचन योग का लाभ उठा कर अपने आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। पंजीकरण शुल्क:-1100/- पंजीकरण की अंतिम दिनांक:-05 अगस्त, 2017 शिविर स्थल:-  श्री नेमीनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, नेमीनाथ जैन काॅलोनी, नोखा रोड,  हिरण मगरी,सेक्टर-3,उदयपुर (राज.) श्रावक संस्कार शिविर  26 अगस्त 2017  से 05 सितम्बर, 2017 संपर्क सूत्र 98291 53802, 94141 60174, 94609 01075, 94143 85504 शिविर के दैनिक कार्यक्रम प्रात: 5.00 बजे ---- ध्यान एवं योग 5.45 बजे ---- सामूहिक अभिषेक एवं शांतिधारा 6.30 बजे---- सामूहिक पूजन 8.30 बजे---- मुनिश्री के प्रवचन (दशलक्षण धर्म) 09.30 बजे----दशलक्षण पूजन विधान 10.00 बजे---- मुनिश्री की आहार चर्य...

दुनिया की सबसे बडी क्वार्ट्ज क्रिस्टल (स्फटिक) की प्रतिमा जी

सागर।  बुंदेलखंड के संभागीय मुख्यालय सागर में सिद्धायतन की सिद्ध भगवान की प्रतिमा गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कर ली गई है। गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्र में दुनिया की सबसे बडी क्वार्ट्ज क्रिस्टल (स्फटिक) की प्रतिमा की उंचाई 32.5 इंच एवं चौड़ाई 24 इंच है। प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के बाद आज सिद्धायतन में ब्रह्मचारी डी. राकेश भैया की उपस्थिति में डाॅ. हरीसिंह गौर विद्यालय के भूगर्भ शास्त्र के प्रोफेसर्स द्वारा पत्रकारों से चर्चा के दौरान उपलब्धि को सांझा किया।  प्रो. अरुण कुमार शांडिल्य ने बताया कि सिंगल क्रिस्टल से बनी दुनिया की एकमात्र प्रतिमा है। जो पाषाण से प्रतिमा बनने के बाद 130 किलो वजनी है। जिसके मूर्ति प्रदाता सागर के ही प्रमोद वारदाना है।  लगभग 18 माह में प्रतिमा तैयार हुई। जिसके बाद सागर में पिछले वर्ष अप्रैल माह में पंचकल्याणक महापूजन का आयोजन किया गया था। राकेश भैया ने बताया कि सिद्ध भगवान के बारे में बताया कि सिद्ध भगवान निर्विकल्प होते हैं। निराकार जैसा कोई आकार नहीं। जैन आगम में अभिषेक बिंब का होता है। मूलनायक के रूप में सिद्ध भगवान का स्व...

दान अमीरों का लक्षण है- मुनि सुधासागर जी

किशनगढ़।  31 जुलाई, 2017 सोमवार, दिगम्‍बर जैनाचार्य 108 श्री विद्यासागर महाराज के सुयोग्‍य शिष्‍य मुनि सुधासागर महाराज ने किशनगढ़-मदनगंज में चल रहे चातुर्मास के दौरान आज धर्मोपदेश देते हुए कहा कि सभी पापों का विनाश धर्म से होता है। पाप में सफल होने के लिए देव, शास्त्र, गुरू व माता-पिता का सहारा नहीं लेना चाहिए। गुरू व बड़े परिजनों की पहचान व अंहकार का उपयोग जीवन में करने पर विनाश निश्चित होगा। भगवान गलत कार्य की सफलता के लिए नहीं, सही कार्य की सफलता के लिए है। भगवान की भक्ति, शक्ति का उपयोग घर बनाने के लिए नहीं, मंदिर बनाने के लिए करना चाहिए। धर्म व सही कार्य के लिए देव, शास्त्र गुरू की सहायता लेनी चाहिए। मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि माचिस दीप जलाने के लिए बनी परन्तु उसका उपयोग घर जलाने के काम में लिया जा रहा है जो पतन की ओर इशारा कर रहा है। सम्यक दृष्टि व ज्ञानी मंदिर में धर्म की सफलता के लिए जाता है। असमर्थ व्यक्ति दूसरों की सहायता लेता है। मुनि श्री ने उदाहरण देेते हुए कहा कि व्यक्ति कभी अकेला भोजन नहीं करता है यह भारतीय संस्कृति के साथ हमारा धर्म भी है। दान अमीरों का ...
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