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Showing posts from June, 2017

दीक्षा समारोह: आचार्य श्री

'एक दिन पारस पारखी, गुरुवर ज्ञानसागर जी महाराज ने चुपके से अपनी पिच्छी के पंख बिखेर दिये और सहज हो कर बोले- विद्याधर! इस पिच्छिका को पुनः बना सकते हो? न शब्द वहाँ था ही नहीं, सो हाँ कह दिया और विद्याधर ने शास्त्रों में वर्णित विद्याधरों की तरह शीघ्र पीछी बना डाली। गुरु जी ने पीछी देखी और देखते ही कह दिया- ब्रह्मचारी, आपका ज्ञान सही में पीछी लेने योग्य हो चुका है। और आज ही के दिन महागुरु आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महामुनिराज ने   आषाढ़ सुदी ५ वि.सं. २०२५, तदनुसार ३० जून १९६८ का दिन। स्थान सोनीजी की नसिया। शहर अमजेर ।  दीक्षा समारोह प्रारंभ होता है। ब्र. विद्याधर खड़े होकर गुरुवर की वंदना करते हैं, हाथ जोड़कर दीक्षा प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं। गुरुवर का आदेश पाकर विद्याधर वैराग्यमयी, सारगर्भित वचनों से जनता को उद्‍बोधन देते हैं तदुपरान्त विद्याधर ने हवा में उड़ने वाले केशों का लुन्चा करना प्रारंभ कर दिया। अपनी ही मुष्टिका में सिर से इतने सारे बाल खींच ले जाते कि देखने वाले आह भर पड़ते हैं। फिर दूसरी मुष्टिका। तीसरी। फिर सिर के बाल निकालते हुए कुछ स्था...

डोंगरगढ़ विशेष

साभार: भास्कर

देवाधिदेव 22 वे तीर्थंकर श्री 1008 नेमिनाथ भगवान

मोक्षकल्याणक तिथि: आषाढ़ शुक्ल सप्तमी शुक्रवार, वि.सं.2543, दि. 30 जून, 2017 श्री गिरनार जी  तिरुमलै  ( तमिलनाडु ) में भगवान  नेमिनाथ की १६ मीटर ऊँची प्रतिमा।

आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी गुरु महाराज के जीवन से जुडी कुछ बातें:

आचार्य श्री ब्र. अवस्था में रोज साइकल चला कर चूलगिरि से 5 की. मी. दूर एक गाव में देश्भूषण जी महाराज के संघ की आहार चर्या हेतु दूध लेने जाते थे। आचार्य श्री की तराह संघ में सभी साधू और आर्यिका बाल ब्रह्मचारी है। विधासागरजी के दीक्षा संस्कार में हुकुमचंद जीलु हाडिया और उनकी पत्नी जतन कँवर बाई माता पिता बने थे।  उन्होने इस हेतु उस समय (30 जून,1968) 25000/- की बोली ली थी। मुनि बन जाने के बाद विद्यासागर जी का प्रथम आहार भाग चंदसोनी (जैन), अजमेर के यहाँ हुआ। मुनि विद्यासागर जी का प्रथम चातुर्मास केसरगंज(अजमेर) में हुआ था। https://isupportjainism.blogspot.in 30-6-1973 को नसीराबाद मेंआचार्य ज्ञानसागर जी कीसमाधी हुई। आचार्य बनने के उपरांत विद्यासागर जी का प्रथम चतुर्मास व्यावर में हुआ। आचार्य श्री ने प्रथम दीक्षा छु. समयसागर, छु. योगसागर, छु. नियमसागर जी को 18 dec-1975 को सोनागिर में दी। माघ शुक्ल पंचमी, वि.सं.2032 को आचार्य धर्मसागर जी के हस्तकमलो से मुज्जफरनगर की पवन धरा पर मल्लपाजी, श्रीमतीजी, शांताजी, स्वर्णाजीकीदीक्षाहुइ (मल्लिसागरजी, समयमतिजी, नियममतिजी, प्रवचनमति...

बहुत ही अलग अंदाज में

आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के ५०वे दीक्षा दिवस के पावन अवसर पर एक महिला आर्टिस्ट द्वारा बहुत ही अलग अंदाज में अपनी भक्ति अर्पण की।  जैनिज़्म परिवार की ओर से बधाई एवं आपका आभार। साभार: मंगल केसली 

डोंगरगढ़ विशेष

साभार: भास्कर

आचार्य श्री १०८ निर्मल सागर जी महाराज

  जन्म: मार्गशीर्ष कृष्णा २ विक्रम संवत २००३ सन १९४६ जन्म स्थान : पहाड़ीपुर जिला एटा अब फिरोजाबाद (उ.प्र.) जन्म का नाम श्री रमेश चन्द्र, माता का नाम : श्रीमती गोमावती, पिता का नाम : श्री सेठ बिहारीलाल, क्षुल्लक दीक्षा : वैशाख शुक्ल १४ सन १९६५ दीक्षा का स्थान : गिरनार पर्वत की चोथी टोंक पर, क्षुल्लक दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ सीमंधर जी महाराज, मुनि दीक्षा : आषाढ़ शुक्ल पंचमी रविवार सन १९६७, मुनि दीक्षा का स्थान : आगरा, मुनि दीक्षा गुरु : आचार्य श्री १०८ विमल सागर जी महाराज (भिंड वाले) आचार्य पद : सन १९७३ विक्रम संवत २०३० आचार्य पद का स्थान : सांगोद (कोटा , राजस्थान ) विशेष : गिरनार पर्वत सत्व संकट निवारक। आचार्य श्री १०८ निर्मल सागर जी महाराज  मुनिराज के श्री चरणों में आई.एस.जे परिवार की ओर से शत शत नमन। नमोस्तु भगवन नमोस्तु  स्त्रोत: jinaagamsaar

त्याग, तपस्या और तरुणाई के 'सागर'

आचार्य श्री विद्यासागर जी महा-मुनिराज के श्री चरणों में आई.एस.जे परिवार की ओर से शत शत नमन। नमोस्तु भगवन नमोस्तु  १९७१ से मीठा व फल त्याग।  १९७६ से रस, फल, मेवा का त्याग।  १९८३ से पूर्ण थूकना बंद।  १९८५ से चटाई पर सोना त्याग। १९९० से नौ दिन का निर्जला व्रत। १९९२ से दिन से दिन में सोना आजीवन त्याग। दीक्षा लेने के बाद से रात्रि में मौन व्रत। दीक्षा लेने के बाद हर दो माह में केस-लोच। धन्य हैं ऐसे महान संत धन्य हैं इनकी चर्या..........!!!

राजनांदगांव, डोगरगढ़ से सीधा प्रसारण

राजनांदगांव, डोगरगढ़ संयम स्वर्ण महोत्सव से सीधा प्रसारण  ⇓ क्लिक करे ⇓ संयम स्वर्ण महोत्सव जुड़ी हर पल की खबर पाने के लिए नीचे दी गई लिंक को आप अपने मोबाइल/टैब/कंप्यूटर/लैपटॉप इत्यादि के ब्राउज़र/गूगल क्रोम/इन्टरनेट आदि में बुकमार्क बनाकर रखे जिससे निरंतर अपडेट होने वाली जानकारियां आपको मिल सके। प्रतिदिन अपडेट होने वाला पहला जैन ब्लॉग। https://isupportjainism.blogspot.in

डोंगरगढ़ में आज से संयम स्वर्ण महोत्सव शुरू

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ आयोजन |  डोंगरगढ़ में आज से संयम स्वर्ण महोत्सव, तीन दिन तक चलने वाले समारोह में देशभर से जुटेंगे लाखों श्रद्धालु, प. पू आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की दीक्षा के 49 वर्ष पूरे  और इसी के 50वां  वर्ष प्रारंभ हुआ  । चंद्रगिरी जैन तीर्थ क्षेत्र डोंगरगढ़ में तीन दिवसीय श्री संयम स्वर्ण महोत्सव की शुरुआत बुधवार को होगी। दिगंबर जैनाचार्य विद्यासागर महाराज की दीक्षा के 49 वर्ष पूरे होने पर एवं  50वां  वर्ष प्रारंभ होने  पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन सीएम डॉ. रमन सिंह और केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी मुख्य अतिथि होंगे। सुबह साढ़े पांच बजे कार्यक्रम शुरू होगा। आचार्य श्री का वंदन व पूजन के साथ ही प्रवचन सुबह 9 बजे होगा। शाम सवा तीन बजे सीएम और केंद्रीय मंत्री भी आयोजन स्थल पर अपनी बातें कहेंगे। मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी गई। दिगंबर जैन चंद्रगिरी तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट संयम स्वर्ण महोत्सव समिति के सुरेंद्र पाटनी और अरविंद जैन ने बताया कि इस कार्यक्रम में देश के वि...

चंद्रगिरि। कल की व्यवस्था

चंद्रगिरि। संयम स्वर्ण महोत्सव में शामिल होंगे एक लाख से अधिक लोग, 5 डोम में रहेगी बैठक व्यवस्था, आयोजन संयम स्वर्ण महोत्सव में शामिल होने देश व विदेशों से भी आएंगे आचार्य के शिष्यगण डोंगरगढ़। आचार्य विद्यासागर महाराज की दीक्षा का 28 जून को 50 वर्ष पूरा होगा। इस अवसर पर 28 से 30 जून तीन दिनों तक संयम स्वर्ण महोत्सव चंद्रगिरी प्रांगण में मनाया जा रहा है। इसको लेकर तैयारी शुरू हो गई है। इसमें देशभर से जैन समाज के एक लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान है। आयोजन समिति ने बैठक व्यवस्था पर अधिक फोकस किया है। बारिश को देखते हुए डोम लगाने के पहले पॉलीथिन लगाया जा रहा है।

दिगंबर व श्वेतांबर संतों के सानिध्य में मनेगा 50 वाँ दीक्षा दिवस

कानपुर। आचार्य श्री का ५०वाँ संयम स्वर्ण महोत्सव दिनांक 28 जून को दिगंबर व श्वेतांबर सम्प्रदाय के साधू-साध्वी मिलकर मनाएंगे, दिगंबर साध्वी क्षुल्लिका अहिंसामति जी, क्षुल्लिका सिद्धमति जी व श्वेतांबर साधू श्री कमलेश मुनि जी आदि 3 साधू श्वेतांबर साध्वी पूज्या प्रियस्मिता श्रीजी म.सा. आदि 6 साध्वी जी मिलकर कानपुर शहर में गुरु गुणगान करेंगे। ज्ञात हो कि दिगंबर साध्वी जी भी आचार्य श्री की शिष्या नहीं है इसके अतिरिक्त भारत के लगभग हर शहर में विभिन्न साधूगणों के संघ सानिध्य में आचार्य भगवंत का दीक्षा दिवस मनाया जा रहा है हम भी अपने नगर में परमोपकारी गुरुदेव का ५०वाँ दीक्षा दिवस मनाकर अपनी भावाञ्जली गुरुचरणों में अर्पित करे। जीवदया के मसीहा आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज मात्र दिगंबरों के पूज्य संत नहीं बल्कि वह जन-जन के है यह कथन आज पुनः सत्य हुआ जब कानपुर शहर से एक अच्छी खबर आई। साभार: अरुण जैन

आचार्यश्री विद्यासागर जी - आरती

विद्यासागर की, गुणआगर की, शुभ मंगल दीप सजाय के। आज उतारूँ आरतिया ... ॥1॥ मल्लप्पा श्री, श्रीमती के गर्भ विषैं गुरु आये। ग्राम सदलगा जन्म लिया है,  सबजन मंगल गाये॥ गुरु जी सब जन मंगल गाये, न रागी की, द्वेषी की, शुभ मंगल दीप सजाय के। आज उतारूँ आरतिया ... ॥2॥ गुरुवर पाँच महाव्रत धारी, आतम ब्रह्म विहारी। खड्गधार शिवपथ पर चलकर, शिथिलाचार निवारी॥ गुरुजी शिथिलाचार निवारी, गृह त्यागी की, वैरागी की, ले दीप सुमन का थाल रे। आज उतारूँ आरतिया...॥3॥ गुरुवर आज नयन से लखकर, आलौकिक सुख पाया। भक्ति भाव से आरति करके, फूला नहीं समाया॥ गुरु जी फूला नहीं समाया, ऐसे मुनिवर को, ऐसे ऋषिवर को, हो वंदन बारम्बार हो। आज उतारुँ आरतिया ... ॥4॥

संतकवि दिगम्बर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

भारत-भू पर सुधारस की वर्षा करने वाले अनेक महापुरुष और संत कवि जन्म ले चुके हैं। उनकी साधना और कथनी-करनी की एकता ने सारे विश्व को ज्ञान रूपी आलोक से आलोकित किया है। इन स्थितप्रज्ञ पुरुषों ने अपनी जीवनानुभव की वाणी से त्रस्त और विघटित समाज को एक नवीन संबल प्रदान किया है। जिसने राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और संस्कृतिक क्षेत्रों में क्रांतिक परिवर्तन किये हैं। भगवान राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, ईसा, हजरत मुहम्मदौर आध्यत्मिक साधना के शिखर पुरुष आचार्य कुन्दकुन्द, पूज्यपाद्, मुनि योगिन्दु, शंकराचार्य, संत कबीर, दादू, नानक, बनारसीदास, द्यानतराय तथा महात्मा गाँधी जैसे महामना साधकों की अपनी आत्म-साधना के बल पर स्वतंत्रता और समता के जीवन-मूल्य प्रस्तुत करके सम्पूर्ण मानवता को एक सूत्र में बाँधा है। उनके त्याग और संयम में, सिद्धांतों और वाणियों से आज भी सुख शांति की सुगन्ध सुवासित हो रही है। जीवन में आस्था और विश्वास, चरित्र और निर्मल ज्ञान तथा अहिंसा एवं निर्बैर की भावना को बल देने वाले इन महापुरुषों, साधकों, संत कवियों के क्रम में संतकवि दिगम्बर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज वर...

हिंसा चार प्रकार की होती है

हिंसा: मन, वचन, काया से किसी भी प्राणी को मारना, दुःख देना एवं स्वयं का घात करना भी हिंसा कहलाती है । हिंसा चार प्रकार की होती है:- संकल्पी हिंसा, आरम्भी हिंसा, उद्योगी हिंसा, विरोधी हिंसा। संकल्पी हिंसा - संकल्प पूर्वक किसी भी प्राणी को मारने का भाव करना यह संकल्पी हिंसा है । संकल्प करने के बाद जीव मरे या न मरे पाप अवश्य ही लगता है । किसी जीव की बलि चढ़ाना, पुतला दहन करना, काष्ठादि में बने चित्रों को मारना, चिड़िया आदि आकार के गोली बिस्कुट खाना, वीडियो गेम में चिड़िया आदि को मारना संकल्पी हिंसा है । आरम्भी हिंसा - गृहस्थ को भोजन के लिए पानी भरना, अग्नि जलाना, हवा करना, वनस्पति छीलना बनाना, घर की सफाई करना, शरीर, वस्त्र आदि की सफाई में षट्काय जीवों की विराधना होती है । यह आरम्भी हिंसा होती है । श्रावक के लिए यह हिंसा क्षम्य है किंतु विवेक जयणा पूर्वक करें । उद्योगी हिंसा - श्रावक का जीवन धन के बिना नहीं चल सकता है । धन प्राप्ति के लिए वह खेती, व्यापार , सरकारी सेवा आदि कार्य करता है । इसमें जो हिंसा होती है, वह उद्योगी हिंसा है । यह भी श्रावक के लिए क्षम्य है । किन्तु विवेक और जय...

आज की तस्वीरे

सांगानेर जी में अतिशय कारी भूगर्भ से निकली जिनबिम्ब प्रतिमाओं की आज की शांति धारा के गंधोदक को आज  श्रीमान अशोक जी पाटनी (R.K. Marbles) ने प.पू आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं संघ को दिया। साभार: संयम स्वर्ण महोत्सव

एक और स्वर्णिम दिन

28 जून 2017 जैन जगत का एक और स्वर्णिम दिन सन्त शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी ऋषिराज के मुनि दीक्षा का 50वा वर्ष प्रारम्भ हो रहा है। अत्यंत हर्ष और गौरव है कि वर्तमान में श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानन्दी जी ऋषिराज, गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी ऋषिराज, स्थिवराचार्य श्री सम्भवसागर जी ऋषिराज और गिरनार गौरव आचार्य श्री निर्मल सागर जी के बाद एक ओर महाऋषि अपनी मुनि दीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण कर रहे है। अपने साधनाकाल में लाखों भव्यात्माओ का कल्याण करने वाले सन्तशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी भगवन्त ने अनेकानेक मुनि-आर्यकाए दीक्षाएं प्रदान की। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाऋषिराज, वात्सल्यरत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी ऋषिराज और तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागर जी ऋषिराज के बाद सन्तशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी भगवन्त ऐसे महायति हे जिनके अतिशय दर्शन को पाने लाखो भक्तगण अपना सौभाग्य मानकर सदैव लालायित रहते है। इस पावन पुनीत स्वर्णिम दिवस पर लाखो श्रावक श्रद्धा पूर्वक उपवास रखकर घरो में 36 दीप प्रज्वलित करके दीपावली की तरह अपने आराध्य गुरु के प्रति महान अनुमोदना की भावना रखेंगे। ...

आज मुनिश्री तरुणसागर जी महाराज का ५०वां अवतरण दिवस हैं

उदयपुरवाटी। महान क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुणसागर जी महाराज का ५०वां अवतरण दिवस हैं, आईएसजे परिवार की और से मुनि श्री के चरणों में शत शत नमन जैसा कि आप सभी जानते हैं मुनि श्री हमेशा कोई न कोई नया इतिहास रचते रहते हैं आज फिर रचा इतिहास उदयपुरवाटी झुंझुनू (राजस्थान) की श्मशान भूमि पर मनाया अपना ५०वां अवतरण दिवस। और धर्म सभा को सम्बोधित किया। धन्य हैं ऐसे मुनि। नाम: पवन कुमार जैन। जन्म: 26 जून 1967, ग्राम गुहजी, जिला दमोह, राज्य मध्य प्रदेश में हुआ था। माता-पिता का नाम: श्रीमती शांतिबाई जैन और प्रताप चन्द्र जैन था। अपने 8 मार्च 1981 में घर छोड़ दिया था, आपकी शिक्षा-दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई है। आपको प्रवचन की वजह से इन्हें 'क्रांतिकारी संत' का तमगा मिला हुआ है। 6 फरवरी 2002 को म.प्र. शासन द्वारा' राजकीय अतिथि ' का दर्जा मिला। 2 मार्च 2003 को गुजरात सरकार ने उन्हें 'राजकीय अतिथि' के सम्मान से नवाजा। The Time of India Front Page Mumbai साभार: एल.एस.आर, परिवार 

सांगानेरजी: आचार्य श्री एवं ससंघ के लिए विशेष विमान से आज का गंधोदक

सांगानेरजी। भूगर्भ से निकले यक्ष-रक्षित जिनविम्वों जिनालय का अभिषेक ( गंधो दक ) एवं आज की शांतिधारा आचार्य श्री एवं समस्त मुनि/ आर्यिका संघ एवं समस्त ब्रम्हचारी प्रतिभास्थली हथकरधा समस्त मानवजाति के नाम से हुई जिसका (गंधोदक) आचार्य श्री एवं ससंघ के लिए विशेष विमान से श्री अशोक जी पाटनी द्वारा चंदगिरि डोगरगढ़ जा रहा हैं ,  विमान सीधे डोंगरगढ़ में उतरेगा !  नोट: अगर आपके पास भी  गुरुदेव  से जुडी कोई भी जानकारियाँ हो तो हमसे जरुर साँझा करे।  📧  ईमेल:   infoissupport@gmail.com साभार : एल.एस.आर परिवार 

कोटा में तैयार हुई आचार्य श्री की पेंटिंग

कोटा। आचार्य भगवंत श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के 50 वें मुनिदीक्षा दिवस आषाढ़ शुक्ल पंचमी (28 जून 2017) के शुभावसर पर देश विदेशों में संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है इसी श्रंखला में कोटा शहर में आचार्य श्री का एक हस्तनिर्मित चित्र तैयार किया गया है जिसके निर्माण में चित्रकार को लगभग 25 दिन से भी अधिक समय लगा उक्त पेंटिंग डोंगरगढ़ के अलावा विभिन्न नगरों में विराजमान उपसंघो के समक्ष जाएगी।  साथ ही देश के महानगरों में आयोजित आर्ट गैलरी में प्रदर्शित होगी।                       पेंटिंग में जहाँ आचार्यश्री तप साधना में लीन दिख रहे है वही.उनके पीछे संयम कीर्ति स्तम्भ भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है।                              पेंटिंग की विदाई के मौके पर चित्रकार की आंखों से छलके आँसु आचार्य श्री के चित्र को तैयार कर रहे सुरेंद्र वर्मा ने दिनरात लगन और श्रम से जब इसको तैयार किया तो लेने पहुंचे गुरुभक्तों को ये तस्वीर सौंपते समय चित्रकार क...

संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी के विचार-सूत्र

सुख दुःख कर्माश्रित है किन्तु समता आत्माश्रित, जो कि कषाय विजय की प्रतीक है। समता के साथ सुख का गठबंधन है। समता के सांचे में ढला हुआ ज्ञान ही विपत्ति के समय काम आता है। समता भाव ध्यान नही है, वह तो राग द्वेष से रहित एक परम पुरुषार्थ है। बाह्य पदार्थों को ओझल कर अपने आप में आने का नाम ही अध्यात्म है। अध्यात्म का अर्थ झुंड नही अकेला है,द्वैत नही अद्वैत है,वह तो एकाकी यात्रा है। जहाँ पर अध्यात्म जीवित है, वहीँपर आत्मा जीवित है। अध्यात्म के बिना जीवन में कोई रस नही रह जाता। चौबीसो घंटे बहिर्मुखी दृष्टि के साथ जीवन चला जा रहा है। उसे छोड़कर अध्यात्म के साथ अंतर्मुखी साधना करनी चाहिये। सुख-शांति बाहर नही अंदर है। अंदर आनंद का सरोवर लहरा रहा है उसमे कूद जाओ तो सारा जीवन शांत हो जाये। एकांत में शांत चित्त से एकत्व का चिंतन जब तक नही चलता तब तक संसारी प्राणी की दीनता समाप्त नही हो सकती क्योकि एकत्व अनुप्रेक्षा में अपना सारा आत्म साम्राज्य सामने आता है फिर दीनता की कोई बात ही शेष नही रह जाती है। आपके भोग का केंद्र भौतिक सामग्री है, किन्तु संतो की भोग सामग्री चैतन्य शक्ति है, जिसमे आ...

संयम स्वर्ण महोत्सव नारे

1. एक ही नारा, एक ही नाम, विद्या गुरूवर तुम्हें प्रणाम । 2. विद्या गुरू को देख लो, त्याग करना सीख लो। 3. एक, दो, तीन, चार, विद्यागुरू की जय-जयकार। 4. पाँच, छः, सात, आठ, विद्यागुरू के प्रभु सम ठाठ। 5. नौ, दस, ग्यारह, बारह, विद्यासागर जग में न्यारा। 6. तेरह, चैदह, पंद्रह, सोलह, बच्चा-बच्चा गुरू की जय बोला। 7. सत्रह, अठारह, उन्नीस, बीस, विद्यागुरू को नवाओ शीश। 8. विद्यासागर संत महान, चलते-फिरते ये भगवान। 9. विद्यागुरू का सच्चा द्वार, हर जीवों से करते प्यार। 10. जब तक सूरज चाँद रहेगा, विद्यासागर नाम रहेगा। https://isupportjainism.blogspot.in 11. बिना तिथि के करें विहार, विद्यासागर सदा बहार। 12. अखिल विश्व में गूँजे नारा, विद्यासागर गुरू हमारा। 13. अखिल विश्व में गूँजे नाद, विद्यासागर जिंदाबाद। 14. विद्यासागर जिसके हैं, जो भी ध्यावे उसके हैं। 15. पाप छोड़ के पुण्य कमाओ, पूरी मैत्री तुम अपनाओ। 16. विद्यागुरू का क्या संदेश, रहो स्वदेश, न जाओ विदेश। 17. जैन जगत के कौन सितारे, विद्यासागर गुरू हमारे। 18. जगमग चमकें विद्यासागर, भरते सबकी खाली गागर। 19. विद्यागुरू के वचन महा...

ब्रेकिंग न्यूज़: शुभ संकेत

चंद्रगिरि। प.पू आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज दे सकते हैं, बाल ब्रह्मचरियों को जैनेश्वरी मुनि दीक्षा।                  आचार्य श्री विद्यासागर जी महायतिराज ससंघ चंद्रगिरि डोंगरगढ़ शुभ क्षेत्र में विराजित है विश्व भर के भक्तों के अनन्त पुण्य के उदय से एवं कई ब्रह्मचारी भैया जी के चलते चंद्रगिरि पहुँचने से ऐसे शुभ संकेत मिल रहे की जैसे हो सकती हैं भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएँ। इसी अनुमान पर आचार्य श्री के सानिध्य में भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएँ होने की संभावना है तिथि/संख्याएँ अभी कोई निश्चित नहीं हैं, लोग सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं हम सब लोग भावना भाए कि त्रैलोक्य के कल्याणार्थ बाल ब्रह्मचारी पिच्छिधारी श्रमणों का नवागमन हो।  https://isupportjainism.blogspot.com नोट: इस संदेश को अभी पक्का नहीं माने, ये सम्भावना मात्र हैं। क्योंकि जिस तरह आचार्य श्री बिना बताए विहार कर जाते है, उसी तरह दीक्षा के बारे में गोपनीयता रखते है यह तो अंदाजा लगाया जा रहा है अब तक ऐसी कोई भी घोषणा आचार्य भगवन द्वारा नहीं की गई हैं।  जाप...

सच में रोंगटे खड़े कर देने वाला चित्र अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है |

शारीरिक दिव्यन्गता के होते हुए भी जिन शासन के हीरे मोती साधू साध्वी जी के विहार में अपनी सक्रीय भागीदारी। सच में रोंगटे खड़े कर देने वाला चित्र अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है।  शाजापुर के श्री विजय भाई को आईएसजे परिवार का प्रणाम। साभार: जैन ज्ञान

संयम स्वर्ण महोत्सव कार्यक्रम की कुछ झलकियां

अजमेर।  २८ जून को संयम स्वर्ण महोत्सव कार्यक्रम के लिए बनायीं जा रही स्टेज की कुछ झलकियां। 

श्री सरस्‍वती नाम स्‍तोत्रम्

सरस्‍वत्‍या: प्रसादेन, काव्‍यं कुर्वन्ति मानवा:। तस्‍मान्निश्‍चल भावेन, पूजनीया सरस्‍वती।।1।। श्री सर्वज्ञ मुखोत्‍पन्‍न, भारती बहुभाषिणी । अज्ञान तिमिर हन्ति, विद्या बहु विकासिनी ।।2।। सरस्‍वतीमया दृष्‍टा, दिव्‍या कमललोचना । हंसस्‍कन्‍ध समारूढा, वीणा पुस्‍तक धारिणी ।।3।। प्रथमं भारती नाम, द्वितीयं च सरस्‍वती । तृतीयं शारदा देवी, चतुर्थ हंसगामिनी ।।4।। पंचमं विदुषांमाता, षष्‍ठं वागीश्‍वरि तथा । कुमारी सप्‍तमं प्रोक्तं, अष्‍टमं ब्रहमचारिणी ।।5।। नमं च जगन्‍माता, दशमं वरदाभावेत् ।।6।। वाणी त्रयोदशं नाम, भाषाचैव चतुर्दशं ।  पंचदशं च श्रुतदेवी, षोडशं गौर्निगद्यते ।।7।।  एकानि श्रुतनामति, प्रातरूत्‍याय य: पठेत् । तस्‍य संतुष्‍यति माता, शारदा वरदा भवेत् ।।8।। सरस्‍वती नमस्‍तुभ्‍यं, वरदे काम रूपिणी । विद्यारंभ करिष्‍यामि, सिद्धिभवतु मे सदा ।।9।। https://isupportjainism.blogspot.com फल प्रात: एक बार पाठ करने से बुद्धि का विकास होता है।  अन्‍तराय कर्मनाश हेतु निम्‍नलिखित मंत्र... मंत्र: ऊँ हृीं श्रीं क्‍लीं मम लाभं अंतराय कर्म निवारणाय ...

चलो सदलगा चलो सदलगा

पावन पवित्र भूमि सदलगा, जिसने इस युग के तीर्थंकर सम गुरुदेव को जन्म दिया, जहाँ की गलियों में विद्याधर ने अठखेलियाँ की, जहाँ के विद्यालयों में विद्या ने अर्जित किया ज्ञान, जहाँ का कण-कण विद्या/पीलू/तोता की लीलाओं से भरा पड़ा है, वह भूमि जिसने पूरा का पूरा परिवार परमेष्ठी बना दिया, उसी महान भूमि कल्याणोदय सदलगा में नगर गौरव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का ५० वाँ दीक्षा दिवस मनाने का सौभाग्य जैनाजैन नगरवासियों को प्राप्त हुआ है, यह सम्पूर्ण बेलगावी जिले का सौभाग्य है कि आचार्यश्री ने यहाँ जन्म लेकर हमें कृतार्थ किया और उनका ५० वाँ दीक्षा दिवस संयम स्वर्ण महामहोत्सव मनाने का सौभाग्य हम सबको प्राप्त हुआ।  इस अवसर पर सदलगा के ही नगर गौरव मुनिश्री नियमसागर जी महाराज ससंघ का परम सानिध्य प्राप्त होगा। संयम स्वर्ण दीक्षा महोत्सव दिनांक 26 जून सोमवार से दिनांक 30 जून शुक्रवार तक मुख्य समारोह शुक्रवार 30 जून 2017 शुभस्थान जन्मभूमि कल्याणोदय तीर्थ सदलगा, तालुका-चिक्कोड़ी, जिला-बेलगावी (कर्नाटक) सानिध्य नगर गौरव प.पू. मुनिश्री नियमसागर जी महाराज प.पू. मुनिश्री प्रबोधसागर ...

नैनागिर। संस्मरण

नैनागिर में हुआ था चमत्कार - आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ नैनागिर में विराजमान थे। वैसे तीर्थ क्षेत्रों पर भीड़ कम रहती है, परन्तु जहाँ स्वयम चलते फिरते तीरथ विराजमान हों। वहाँ तो मेला लगा ही रहता है, सुबह का समय था आचार्य भगवन ससंघ मंच पर आसीन थे और प्रवचन चल रहे थे, सब लोग शांत होकर गुरु की अमृत वाणी सुन रहे थे, वही टेंट के खम्बे के पास एक छोटा सा छिद्र था उसमे एक सर्प छिपा हुआ आराम से आचार्य भगवन को देख रहा था, अचानक पास बैठे एक व्यक्ति की नजर उसपर गई और वो घबराकर उठ गया और चिल्लाने लगा सांप - सांप, उसे देखकर सब लोग उठकर खड़े हो गए और इधर उधर भागने लगे वो सर्प मंच के पास आया और जोर जोर से नृत्य करने लगा, वहाँ उपस्थित लोग आश्चर्य से देखने लगे ये क्या हो रहा है, आचार्य भगवन भी अपनी चिरपरिचित मुस्कान लिये उसे देख रहे थे,  https://isupportjainism.blogspot.com   उस समय मोबाइल नही चलते थे तो कुछ कैमरे वाले लोग जो वहाँ आचार्य श्री के प्रवचन रिकॉर्ड कर रहे थे, वो अपने कैमरे से पूरी घटना रिकॉर्ड करने लगे, थोड़ी देर बाद उस सर्प ने आचार्य श्री को तीन बार जमीन पर फन र...

श्री विधासागर नाम

गुरु के दरबार में दुनिया बदल जाती है रहमत से हाँथ की लकीर बन जाती है लेता जो भी दिल से श्री विद्यासागर नाम एक क्षण में उसकी तकदीर बदल जाती है हे गुरुवर विद्यासागर ऐसी निराली चर्या के धनी चरणों में जिसने नमन किया उसकी बिगड़ी हर बात बनी।  नमोस्तु भगवन नमोस्तु

संयमोत्सव रथ का लोकापर्ण

अजमेर। नगर में संयम स्वर्ण महोत्सव का आठ-दिवसीय कार्यक्रम बड़ी धूमधाम से शुरू हुआ। महोत्सव के पहले दिन केसरगंज जैन मंदिर से रथयात्रा निकाली गयी, जिसमें राजेंद्र कुमार, अजय कुमार, विजय कुमार दनगसिया परिवार द्वारा निर्मित कराया गया स्वर्णमयी ज्ञान विद्या संयमोत्सव रथ का लोकापर्ण किया गया। https://isupportjainism.blogspot.in   छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ्र में विराजमान आचार्यश्री विद्यासागर के पावन सानिध्य में आयोजित रथयात्रा में यह स्वर्णमयी रथ भी शामिल होगा। पुखराज पहाड़िया के अनुसार आचार्यश्री को समर्पित संयम स्वर्ण महोत्सव रथ 28 जून से पूरे वर्ष देश के विभिन्न स्थानों पर जाकर जैन धर्म का प्रचार-प्रसार करेगा। साभार: गंभीर भक्त 

दर्शन - भावना

पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी। यही है भावना स्वामी-यही है प्रार्थना स्वामी।। तुम्हारे दर्श बिन स्वामी, कहाँ हम चैन पायेंगे। प्रभुवर! याद आयेगी - नयन आंसू बहायेंगे।। निकाली नीर से मछली, तड़पती चेतना स्वामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। https://isupportjainism.blogspot.com बिना स्वाति की बूँदों के, पपीहा प्राण तज देगा। कृपा के मेघ बरसा दो, जिनेश्वर नाम रट लेगा।। निहारे चातका तुमको, यही रटना रटे लेगा।। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। विरह की वेदना स्वामी - तुम्हें कैसे सुनायें हम। चाँद बिन ज्यों चकोरे सा - हमारा आज ये तन - मन।। शिशु माता से बिछड़ा ज्यों रुदन करता रहे स्वामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। https://isupportjainism.blogspot.com नहीं सुर सम्पदा चाहूँ - नहीं मैं राजपद चाहूँ। यही है कामना मेरी, प्रभु तुमसा ही बन जाऊँ।। मिले निर्वाण न जौलों, रहो नयनों के पथगामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। रचयिता - सारस्वत कवि आचार्य श्री विभावसागर साभार: एल.एस.आर परिवार, सागर

जैसा आप खाते है वैसा आप सोचते हैं।

रात में भोजन, पानी आदि ग्रहण करना जैन धर्म में निषेध हैं। इस निषेध के कई कारण हैं, कीटाणु और रोगाणु जिनको नग्न आंखों से देखना असंभव हैं, वे सूरज की रौशनी में गायब हो जाते हैं, वास्तव में नष्ट नहीं होते; वे छायादार स्थानों में शरण लेते हैं और सूर्यास्त के बाद वे वातावरण में प्रवेश कर उसे व्याप्त करते हैं और फिर हमारे भोजन में मिल जाते हैं। इस तरह का भोजन उपभोग करने से कीटाणुओं और जीवाणुओ की हत्या होती हैं और बारी में हमारे बीमार स्वास्थ्य का कारण बनते हैं। हमारी जैविक घड़ी, सूर्य के उदय-अस्त के अनुसार सेट की गयी है। जब सूरज हमारे बिलकुल ऊपर होता है, तब हमारी जठराग्नि उसकी चरम सीमा पर होती है। रात के समय में खाना ठीक से नहीं पचता क्योंकि पाचन प्रणाली रात में सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति के कारण निष्क्रिय हो जाती है और हमें अपच की समस्या का सामना करना पड़ता है। इन घंटो के दौरान रस प्रक्रिया धीमी हो जाती हैं क्योंकि हम किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि में लिप्त नहीं होते जिससे पाचन में मदद मिलती हो। इसलिए रात के समय में ग्रहण किया हुआ भोजन पचा नहीं करता और वह शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हा...

ऐसा व्यक्ति ढूंढकर लाओ

आपको कोई कहे कि ऐसा व्यक्ति ढूंढकर लाओ जो ज़िन्दगी भर बिजली का उपयोग न करता हो, वाहन में न बैठता हो, स्नान न करता हो, बैंक में जिसका खाता न हो, जिसके पास रहने के लिए घर न हो, गांव में खेत न हो, जो पैसा न कमाता हो , जो विवाह न करता हो, जिसका परिवार न हो, पैर में जुते न पहनता हो, जिसके पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, ड्राईविंग लाईसेंस आदि न हो, जिसे पासपोर्ट की जरुरत न हो, जिसे दर्जी, नाई, मोची, सुथार, लुहार, घांची, तेली, वणिक आदि लोगो की जरुरत न पड़े और फिर भी जो सदैव सुखी रहे, तो आपको कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं, जैन साधू के रूप में ऐसे व्यक्ति आपके आस पास विचरण करते हुए नज़र आ जाएंगे।  https://isupportjainism.blogspot.com भारत का संविधान 1950 में बना था और अब तक 64 सालों में इसमें 100 से अधिक संशोधन हो चुके हैं परंतु एक संविधान आज से 2570 वर्ष पूर्व शासन स्थापना के दिन भगवान महावीर ने साधू के लिए बनाया था जो आज तक एक बार भी परिवर्तित नहीं हुआ । 2570 वर्ष पूर्व जैन साधू जो जीवन जीते थे, आज के आधुनिक चकाचौंध भरे युग में भी वैसा ही जीवन जी रहे हैं।  नोट:...

स्वर्णिम इतिहास को बनाने वाले

जब से जगत पूज्य ने घोषणा की सांगानेर के संघी जी जैन मंदिर के तलघर में विराजमान अक्रतिम चैत्यालय जो कि यक्ष रक्षित है जगत की कल्याण की भावना के निहितार्थ निकाला जा रहा है तभी से संसार के सभी लोग बहुत ही खुश और प्रशन्न है वही कुछ प्राणी जिन्हें मात्र रात्रि में ही दिखाई देता है और उन्हें हम सरल भाषा मे उल्लू कह कर पुकारते है ये वो प्राणी है जिन्हें मात्र अंधकार ही पसंद है उन्हें आज सांगानेर की साज सज्जा से उतपन्न हो रही चकाचोंध बिलकुल भी नही भा रही है क्योंकि उनकी आंखें जो चोन्धिया रही है ओर इसी बात का क्षोभ उनकी अनर्गल पोस्टों से स्पष्ट दिखाई दे रहा है उन्हें तो बस जैसे रोशनी की बुराई ही करनी है सो करे जा रहे है वह अच्छा देखने और मानने का भी मन नही बना पा रहे है यह उनकी हेय बुद्धि को दर्शा रहा है लेकिन इसके विपरीत मुनि पुंगव के आशीर्वाद से सम्पन्न हो रहा अमृतसिद्धि दर्शन एवं कलश महोत्सव अपने पूरे शबाब पर है जहां एक ओर पैर रखने की भी जगह शेष नही है परंतु उचित व्यवस्थाओं के चलते किसी भी एक आदमी को किंचित भी समस्या नही दिखाई दे रही है सभी खुश और प्रशन्न है चारो ओर जय जय कार की आवाजें ओर ...

प्रकाश और विकास में धर्म की ऐसी आस्था जागी

विदेश में पढ़े 45-45 लाख रुपए के पैकेज पर अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर। पांच साल तक जॉब भी किया, लेकिन धर्म की ऐसी आस्था जागी कि दोनों भाइयों ने नौकरी छोड़ दी। दोनों की पत्नियों ने भी इसलिए छोड़ दी नौकरी। इंदौर। प्रकाश और विकास छाबड़ा, दोनों सगे भाई। अब पाठशाला में बच्चों, युवाओं को जैन धर्म की शिक्षा, नैतिक शिक्षा दे रहे हैं और सुखी जीवन जीने की कला सिखा रहे हैं। वह भी बिना शुल्क लिए। साल में चार संस्कार शिविर का आयोजन करते हैं। यही अब उनकी दिनचर्या बन गई है। पहले बड़े भाई प्रकाश और बाद में छोटे भाई विकास ने धर्म के मार्ग पर चलने के लिए नौकरी छोड़ी और वापस वतन लौट आए।  दोनों भाइयों की शादी भी हो चुकी है। पत्नियां भी अमेरिका में ही नौकरी कर रही थी, लेकिन उन्होंने भी नौकरी छोड़ दी।  प्रकाश की पत्नी पूजा सीए हैं। वहीं विकास की पत्नी सारिका सॉफ्टवेयर इंजीनियर।   प्रकाश बताते हैं कि गांधी नगर में जैन मंदिर है, जिसकी देखरेख हमारे परिवार के लोग ही करते हैं। वहां पर पाठशाला संचालित करने के अलावा आसपास के जरूरतमंद बच्चों के स्कूल क...

विश्व योग दिवस विशेषांक

क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी महाराज जिनवाणी पुत्र क्षुल्लक श्री ध्यानसागर जी महाराज श्री की आध्यात्मिक साधना की ध्यान एवं योग के विषयक कुछ विशेष जानकारी ध्यान और योग जैन साधना के प्राण हैं। मन, वचन और काया का स्पन्दन शान्त करके योगी योग अर्थात् ध्यान के माध्यम से अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। पूज्य महाराज श्री के विषय में एक विशिष्ट जानकारी अपने गुरु से प्राप्त ध्यानसागर यह नाम आज जन-जन के हृदय में जिनवाणी का सच्चा ज्ञान प्रदान करानेवाले जिनवाणी पुत्र क्षुल्लक श्री ध्यानसागरजी महाराज के रूप में विराजमान है। अपने ३२ वर्षीय जैन दीक्षाकाल में महाराज श्री ध्यान के विशेष अनुभवों को प्राप्त करके अपना नाम सार्थक कर चुके हैं। उनकी साधना की ऊर्जा से अनेकों भक्तों और श्रद्धालुओं ने अपनी समस्याओ के अद्भुत समाधान प्राप्त किए हैं।विभिन्न आसनों और योग-प्राणायाम के माध्यम से वे अपनी शारीरीक ऊर्जा को अपनी साधना में विशेष रूप से उपयोग कर जैन साधना के निरंतर अभ्यास में रत हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य है आगम का सच्चा ज्ञान जन-जन को प्राप्त हो। जिनशासन जयवंत हो।  साभार: आगमधारा परिवार
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