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दर्शन - भावना

पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी। यही है भावना स्वामी-यही है प्रार्थना स्वामी।। तुम्हारे दर्श बिन स्वामी, कहाँ हम चैन पायेंगे। प्रभुवर! याद आयेगी - नयन आंसू बहायेंगे।। निकाली नीर से मछली, तड़पती चेतना स्वामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। https://isupportjainism.blogspot.com बिना स्वाति की बूँदों के, पपीहा प्राण तज देगा। कृपा के मेघ बरसा दो, जिनेश्वर नाम रट लेगा।। निहारे चातका तुमको, यही रटना रटे लेगा।। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। विरह की वेदना स्वामी - तुम्हें कैसे सुनायें हम। चाँद बिन ज्यों चकोरे सा - हमारा आज ये तन - मन।। शिशु माता से बिछड़ा ज्यों रुदन करता रहे स्वामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। https://isupportjainism.blogspot.com नहीं सुर सम्पदा चाहूँ - नहीं मैं राजपद चाहूँ। यही है कामना मेरी, प्रभु तुमसा ही बन जाऊँ।। मिले निर्वाण न जौलों, रहो नयनों के पथगामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। रचयिता - सारस्वत कवि आचार्य श्री विभावसागर साभार: एल.एस.आर परिवार, सागर

प्रमुख जैन तीर्थ: मध्यप्रदेश, बुंदेलखंड

सोनागिरि: ग्वालियर झाँसी लाइन पर सोनागिरि स्टेशन से 2 मील श्रमणाचल पर्वत है। पहाड़ पर 77 दिगंबर जैन मंदिर हैं। वहाँ से नंगानंगकुमार आदि साढ़े पाँच सौ करोड़ मुनि मोक्ष गए हैं। पपौरा: ललितपुर से 36 मील और टीकमगढ़ से 3 मील है। चारों ओर कोट बना है। यहाँ लगभग 90 मंदिर हैं। कार्तिक सूदी 14 को मेला भरता है। चन्देरी: ललितपुर से 24 मील। वहाँ से मोटर जाती है। यहाँ की चौबीसी भारतवर्ष में प्रसिद्ध है। पचराई:चन्देरी से 24 मील खनियाधाना स्थान है। वहाँ से 8 मील पर पचराई गाँव है। यहाँ पर 28 जिन मंदिर हैं। थूबौन: चन्देरी से आठ मील। यहाँ 25 मंदिर हैं। भगवान शांतिनाथ की 20 फुट उत्तुंग मूर्ति अपनी विशालता के लिए प्रसिद्ध है। अतरिक्ष पार्श्वनाथ: सेंट्रल रेलवे के अकोला (बरार) स्टेशन से लगभग 40 मील पर शिवपुरी नाम का गाँव है। गाँव के मध्य धर्मशालाओं के बीच में एक बहुत बड़ा प्राचीन विशाल दुमंजिला जैन मंदिर है। नीचे की मंजिल में एक श्यामवर्ण ढाई फुट ऊँची पार्श्वनाथजी की प्राचीन प्रतिमा है। जो वेदी के ऊपर अधर में विराजमान है। खजुराहो: मध्यप्रदेश में छतरपुर से 7 मील। यह एक छोटा सा गाँव है। 31 दि...

जाप्य मंत्र सूची

35 अक्षरों का मंत्र :- णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं।। 16 अक्षरों का मंत्र :- अरहंत सिद्ध आइरिया उवज्झाया साहू 6 अक्षरों का मंत्र :- (1) अरहन्त सिद्ध (2) अरहन्त सि सा (3) ॐ नमः सिद्धेभ्य (4) नमोऽर्हत्सिद्धेभ्यः 5 अक्षरों का मंत्र :- अ सि आ उ सा 4 अक्षरों का मंत्र :- (1) अरहन्त (2) अ सि साहू 2 अक्षरों का मंत्र :- (1) सिद्ध (2) ॐ ह्रीं 1 अक्षरों का मंत्र :- ॐ (ओम्) यह ध्वनि पांचो परमेष्ठी नामों के पहले अक्षर मिलाने पर बनती है। यथा अरहन्त का पहिला अक्षर 'अ', अशरीरी (सिद्ध) का 'अ', आचार्य का 'आ', उपाध्याय का 'उ', तथा मुनि (साधु) का 'म्', इस प्रकार अ+अ+आ+उ+म् = ॐ (यह 'ओ3म्' इस प्रकार भी लिखा पाया जाता है जो कि अशुद्ध है) रत्नत्रय जाप्य मंत्र :- ॐ ह्रीं श्रीसम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्रेभ्योनमः
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