पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी। यही है भावना स्वामी-यही है प्रार्थना स्वामी।। तुम्हारे दर्श बिन स्वामी, कहाँ हम चैन पायेंगे। प्रभुवर! याद आयेगी - नयन आंसू बहायेंगे।। निकाली नीर से मछली, तड़पती चेतना स्वामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। https://isupportjainism.blogspot.com बिना स्वाति की बूँदों के, पपीहा प्राण तज देगा। कृपा के मेघ बरसा दो, जिनेश्वर नाम रट लेगा।। निहारे चातका तुमको, यही रटना रटे लेगा।। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। विरह की वेदना स्वामी - तुम्हें कैसे सुनायें हम। चाँद बिन ज्यों चकोरे सा - हमारा आज ये तन - मन।। शिशु माता से बिछड़ा ज्यों रुदन करता रहे स्वामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। https://isupportjainism.blogspot.com नहीं सुर सम्पदा चाहूँ - नहीं मैं राजपद चाहूँ। यही है कामना मेरी, प्रभु तुमसा ही बन जाऊँ।। मिले निर्वाण न जौलों, रहो नयनों के पथगामी। पुनः दर्शन -पुनः दर्शन-पुनः दर्शन मिले स्वामी।। रचयिता - सारस्वत कवि आचार्य श्री विभावसागर साभार: एल.एस.आर परिवार, सागर
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