चत्तारि मंगल पाठ जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और महामंत्र के समान वंदनीय पाठ है। यह पाठ जैन दर्शन के सर्वोच्च पदों, महान आत्माओं और उनके द्वारा बताए गए धर्म को नमन करने और उनके स्मरण मात्र से जीवन में मंगल (कल्याण) की कामना करने के लिए किया जाता है।
📜 चत्तारि मंगल पाठ (मूल पाठ)
चत्तारि मंगलं, अरिहंता मंगलं, सिद्धा मंगलं, साहू मंगलं, केवली पण्णत्तो धम्मो मंगलं।
चत्तारि लोकुत्तमा, अरिहंता लोकुत्तमा, सिद्धा लोकुत्तमा, साहू लोकुत्तमा, केवली पण्णत्तो धम्मो लोकुत्तमा।
चत्तारि शरणं पवज्जामि, अरिहंते शरणं पवज्जामि, सिद्धे शरणं पवज्जामि, साहू शरणं पवज्जामि, केवली पण्णत्तं धम्मं शरणं पवज्जामि।
चत्तारि मंगल पाठ का हिंदी अर्थ (भावार्थ)
- मंगल पाठ:
- संसार में चार ही चीजें परम मंगलकारी (कल्याणकारी) हैं—अरिहंत भगवान, सिद्ध भगवान, साहू (साधु), और केवलज्ञानी भगवान द्वारा प्ररूपित (बताया गया) जिनधर्म मंगल रूप हैं।
- लोकोत्तम पाठ:
- संसार में चार ही वस्तुएं लोकोत्तम (लोक में सबसे श्रेष्ठ/सर्वोच्च) हैं—अरिहंत, सिद्ध, साधु, और केवलज्ञानी भगवान द्वारा बताया गया धर्म लोकोत्तम हैं।
- शरण पाठ:
- मैं इन चार की ही शरण में जाता हूँ—अरिहंतों की शरण, सिद्धों की शरण, साधुओं की शरण और केवलज्ञानी द्वारा बताए गए धर्म की शरण ग्रहण करता हूँ।
इस पाठ का महत्व व स्मरण अवसर
- नित्य स्मरण: जैन समाज में प्रातःकाल उठकर, स्वाध्याय या पूजा-पाठ के आरंभ तथा रात्रि को सोने से पहले इस पाठ का विशेष रूप से स्मरण किया जाता है।
- शांति और सुरक्षा: इस पाठ के नियमित स्मरण से मन को असीम शांति मिलती है, भय दूर होता है और यह आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
- पर्व विशेष: दीपावली (मोक्ष कल्याणक), पर्युषण पर्व और अन्य धार्मिक आयोजनों पर घरों और मंदिरों में णमोकार मंत्र के साथ 'चत्तारि मंगल पाठ' का सामूहिक वाचन किया जाता है।
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